रायबरेली। जिले में कैंसर, हाइपर टेंशन, शुगर सहित अन्य गंभीर रोगियों की स्क्रीनिंग का काम ठप हो गया है। नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी) अभियान जिले में नाकाम हो गया है। कई महीने पहले आई प्रचार सामग्री सीएचसी में ठप पड़ी है।
आशा बहुओं के माध्यम से 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग कराई जानी थी और प्रति फार्म भरने पर आशा बहुओं को 10 रुपये भी मिलने थे, लेकिन योजना जिले में धड़ाम हो गई है।
एनसीडी कार्यक्रम के तहत जिले की करीब 35 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग करनी थी। 30 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का आशा बहुओं को फार्म भरकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को चिह्नित करना था, लेकिन अब तक शासन की मंशा पर काम शुरू नहीं हुआ है।
शासन से आए फार्म और प्रचार सामग्री अधीक्षकों की भेंट चढ़ गए हैं। हरचंदपुर, ऊंचाहार, लालगंज व जगतपुर सहित सभी सीएचसी में फार्म और प्रचार सामग्री डंप पड़ी है।
कई महीने बाद भी स्क्रीनिंग का काम न शुरू हो पाने से गांवों में काम कर रहीं आशा बहुओं को उनका हक भी नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय कार्यक्रम में जिले में दम तोड़ रहा है।
कोरोना के चक्कर में एनसीडी कार्यक्रम दबा
जिले में पिछले मई से जुलाई महीने तक कोरोना का काफी असर होने के कारण एनसीडी कार्यक्रम दब गया। हालांकि अब कोरोना दम तोड़ गया है, लेकिन विभाग एनसीडी कार्यक्रम को शुरू कराने के लिए ध्यान नहीं दे रहा है। इसका खामियां गंभीर रूप से बीमार लोगों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि उनके चिह्नित होने के बाद उनका इलाज शुरू हो सकता है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय का 30 सितंबर को रायबरेली आने का कार्यक्रम आया है। हालांकि उनके कार्यक्रम को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है। किसी तरह सब कुछ अच्छा दिखाने के लिए सीएचसी पर कागजों को पूरा कराया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर सभी अधीक्षकों को अल्टीमेटम भी दिया जा चुकी है।
कोरोना के कारण एनसीडी कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया था। अब कोरोना खत्म होने के कारण कार्यक्रम शुरू कराया गया है। शासन की मंशा पर एनसीडी कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी