जगतपुर क्षेत्र में सड़क पर उखड़कर फैलीं गिट्टियां। -संवाद
रायबरेली। अमेरिका, ईरान और इस्राइल युद्ध के चलते तारकोल के दाम कम नहीं हो रहे हैं। इससे तीन करोड़ रुपये के निर्माण कार्य ठप हैं। ठेकेदारों ने गिट्टियां तो डाल दी हैं, लेकिन अब तक डामर, तारकोल और गिट्टियों का मिश्रण नहीं डाला है। इससे सड़कों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इस समय तारकोल 89 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है, जो ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा है।
जिले में सड़कों के निर्माण में सबसे ज्यादा तारकोल और डामर का प्रयोग होता है। पिछले दिनों युद्ध के चलते इसकी कीमत दोगुनी हो गई। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से 56 सड़कों का निर्माण का टेंडर पहले से ही हो चुका है। इन टेंडराें में तारकोल के दाम पहले के रेट पर डाले गए, लेकिन ये रेट अब बढ़ गए हैं।
इससे ठेकेदार पुराने रेट पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे कहीं पर सड़क पर गड्ढे हैं, तो कहीं पर केवल गिट्टियां डाल दी गई हैं। सड़क पर फैली गिट्टियों की वजह से आए दिन लोग गिरकर घायल होते रहते हैं।
ठेकेदार संगठन के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि पुराने दर पर काम करने में समस्या हो रही है। दोबारा नए रेट से टेंडर निकालने की मांग चल रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने ने बताया कि पहले तारकोल के दाम 43 रुपये प्रति किलो थे, जो अब बढ़कर 89 रुपये हो गए हैं। इससे सड़कों का निर्माण कराने में दिक्कत हो रही है।