पुलिस लाइंस में मेंटीनेंस के नाम पर तीन लाख रुपये कमीशन मांगने वाले आरआई और पुलिस दफ्तर में तैनात लिपिक को सस्पेंड कर दिया गया है। कमीशन न मिलने पर आरआई ने लिपिक से सेटिंग-गेटिंग कर ठेका दूसरे को दे दिया था।
पूरे मामले की शिकायत ठेकेदार ने आईजी जोन से की थी। आईजी ने मामले की जांच डीआईजी को करने के निर्देश दिए गए थे। ठेकेदार के डीआईजी कार्यालय में बयान भी दर्ज किए गए थे। बताया जा रहा है कि निलंबन के अलावा दोनों की विभागीय जांच भी कराई जा रही है।
शहर के नदी तीर कजियाना निवासी एवं ठेकेदार मो. शरीफ ने अप्रैल में ही आईजी ए सतीश गणेश से शिकायत की थी कि पुलिस लाइंस में 11 लाख रुपये से मेंटीनेंस का कार्य कराने का ठेका उसे दिया गया था। आरआई ने तीन लाख रुपये कमीशन की डिमांड की।
रुपया न देने पर आरआई ने मेंटीनेंस कराने के कार्य का ठेका दूसरे ठेकेदार को दे दिया था। शिकायत पर आईजी ने डीआईजी प्रवीण कुमार को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इस पर डीआईजी ने जांच शुरू की थी। चार दिन पहले डीआईजी कार्यालय में ठेकेदार के बयान दर्ज किए गए थे।
अब इस मामले में कार्रवाई कर दी गई है। एसपी अब्दुल हमीद का कहना है कि पुलिस लाइंस के प्रतिसार निरीक्षक राजवीर सिंह गौर और बाबू जबर सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया गया है। दोनों की विभागीय जांच भी कराई जा रही है।
कुर्सी संभालने के बाद से ही आरआई विवादों के घेरे में रहे। पहले आरआई का नाम पुलिस कर्मियों को भोजन देने के नाम पर घपला किए जाने में सामने आया था। इसके बाद एक महिला खिलाड़ी सिपाही को प्रैक्टिस की अनुमति न देेने पर वे चर्चा में आए।
अब कमीशन की डिमांड पूरी न होने पर ठेका दूसरे ठेकेदार को देने के मामले में सुर्खियों में आए। उन पर हर बार आरोप लगते रहे। सेटिंग-गेटिंग करके बचते रहे, लेकिन इस बार उनकी एक नहीं चली और उन पर निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।