आल इंडिया रेलवे मेंस यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के पदाधिकारियों ने हक के लिए हुंकार भरी। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर रेल कर्मियों ने धरना देकर अफसरों के खिलाफ भड़ास निकाली।
साथ ही एक स्वर में कहा कि रेलवे को प्राइवेट सेक्टर में देने की राय देने वाली डॉ. विवेक देवराय समिति की रिपोर्ट किसी को स्वीकार नहीं है। इसे पूरी तरह से रद्द किया जाए।
शाखा मंत्री सुधीर तिवारी ने कहा कि समिति के अध्यक्ष डॉ. देवराय एवं समिति के सदस्य का रेलवे से कभी भी कोई संबंध नहीं रहा।
ऐसे में उनसे रेलवे की असली समस्या की पहचान और उनके समाधान की अपेक्षा किया जाना सिरे से गलत है, बल्कि ऐसी किसी समिति के गठन का औचित्य ही नहीं था।
एसके सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की नीति कर्मचारियों के हितों का ध्यान न रखकर पूरी तरह से रेलवे के निजीकरण की सिफारिश कर रही है।
जावेद ने बताया कि 30 जून को सभी कर्मचारी अपने कार्य स्थल पर काला फीता बांधकर काला दिवस मनाएं और समिति को पूरी तरह से रद्द करने के लिए आवाज उठाएं।
धरने का संचालन करते रहे राकेश तिवारी ने कहा कि इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आरए दुबे ने केंद्र सरकार को रेल हित में काम करने की बात कही।
अल्ताफ अहमद ने बताया कि इसको लेकर राष्ट्र व्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। शाखा मंत्री ने बताया कि इस समिति की रिपोर्ट रद्द नहीं की गई तो 23 नवंबर से बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
इस मौके पर राजू श्रीवास्तव, रामशंकर, रामशरण, देव कुमार, रमजान अली, राकेश कुमार, सुरेश दीक्षित, आरपी मिश्रा, एसके सिंह, ललित कुमार, रामफेर मौजूद रहे।