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Raebareli: खोदाई हुई तो मिल सकता है 2,000 साल पुराना नगर, प्राचीन नगरीय संरचना के अवशेष मिले

Fri, 31 Jul 2026 10:57 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, रायबरेली

सार

सहायक पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यहां से मिट्टी के बर्तन तथा अन्य प्राचीन अवशेष मिले हैं, जो लगभग दो हजार वर्ष पुराने यानी कुषाणकाल के प्रतीत होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अवशेष किसी सुरंग के नहीं हैं। ग्रामीणों ने भी खोदाई कराने की मांग की है।
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खोदाई में बरामद हुए अवशेष। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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रायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र में स्थित ओई भीट गांव में कथित सुरंग मिलने की चर्चा के बीच पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक जांच ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। विभाग की टीम का कहना है कि यहां सुरंग होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, बल्कि जो प्राचीन अवशेष सामने आए हैं, वे करीब 2000 वर्ष पुराने कुषाणकाल की एक नगरीय संरचना की ओर संकेत करते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और राज्य सरकार वैज्ञानिक तरीके से विस्तृत सर्वेक्षण और खोदाई कराएं, तो यहां एक प्राचीन ऐतिहासिक नगर के प्रमाण मिल सकते हैं। करीब एक सप्ताह पहले हुई तेज बारिश के बाद गांव के किसान सुशील मौर्या के खेत में गड्ढा हो गया था।

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सुशील जब मौके पर पहुंचे तो उन्हें गड्ढे में पक्की ईंटों से बनी दीवार दिखाई दी। इसकी सूचना लगते ही स्थानीय लोगों ने इसे सुरंग मान लिया। बुधवार को लखनऊ से पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया।

सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यहां से मिट्टी के बर्तन तथा अन्य प्राचीन अवशेष मिले हैं, जो लगभग दो हजार वर्ष पुराने यानी कुषाणकाल के प्रतीत होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अवशेष किसी सुरंग के नहीं हैं। मोटी ईंटों की दीवारें और अन्य संरचनात्मक साक्ष्य एक विकसित प्राचीन नगरीय बसावट की ओर संकेत करते हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।

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ऐतिहासिक स्थलों में शामिल हो सकता है ओई भीट

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे की जांच में प्रारंभिक निष्कर्षों की पुष्टि होती है, तो ओई गांव उत्तर भारत के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में शामिल हो सकता है। इसकी तुलना बिहार के पटना, मधुबनी और सिवान तथा यूपी के मथुरा, दिल्ली और हरियाणा व पंजाब के प्राचीन नगरों से जुड़े पुरातात्विक स्थलों से की जा सकेगी।

ग्रामीणों ने की गांव में खोदाई कराने की मांग
खेत मालिक सुशील मौर्या ने बताया कि सन 1995-96 और 1996-97 में भी यहां प्राचीन अवशेष मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे किया था लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते सर्वे का काम आगे नहीं बढ़ सका था। जिसका ब्योरा खसरा नंबर 141 में दर्ज है। वहीं पूर्व प्रधान एवं प्रधान प्रधान प्रतिनिधित्व हरिश्चंद्र मौर्य, राममिलन, मनोज कुमार सहित कई ग्रामीणों ने सरकार से ओई भीट की खोदाई कराने की मांग की है।
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