पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे की जांच में प्रारंभिक निष्कर्षों की पुष्टि होती है, तो ओई गांव उत्तर भारत के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में शामिल हो सकता है। इसकी तुलना बिहार के पटना, मधुबनी और सिवान तथा यूपी के मथुरा, दिल्ली और हरियाणा व पंजाब के प्राचीन नगरों से जुड़े पुरातात्विक स्थलों से की जा सकेगी।
ग्रामीणों ने की गांव में खोदाई कराने की मांग
खेत मालिक सुशील मौर्या ने बताया कि सन 1995-96 और 1996-97 में भी यहां प्राचीन अवशेष मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे किया था लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते सर्वे का काम आगे नहीं बढ़ सका था। जिसका ब्योरा खसरा नंबर 141 में दर्ज है। वहीं पूर्व प्रधान एवं प्रधान प्रधान प्रतिनिधित्व हरिश्चंद्र मौर्य, राममिलन, मनोज कुमार सहित कई ग्रामीणों ने सरकार से ओई भीट की खोदाई कराने की मांग की है।