रायबरेली। शहरवासियों को जलभराव से राहत दिलाना एक चुनौती है। हर साल लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी स्थिति जस की तस है। अफसरों का दावा है कि घर बनाते समय यदि पानी निकासी का इंतजाम कर लिया जाए तो जलभराव की नौबत नहीं आए।
नगर पालिका परिषद रायबरेली के 34 वार्डों में करीब ढाई लाख की आबादी रहती है। पानी निकासी के लिए छोटे बड़े मिलाकर कुल 99 नाले हैं। मानसून से पहले पालिका का दावा है कि नालों की साफ-सफाई कराई गई है, लेकिन इसके उलट जलभराव से नागरिकों को राहत नहीं मिल पाती है। बारिश होने पर जलभराव इस कदर होता है कि नागरिकों के घरों तक पानी घुस जाता है।
नालों की साफ-सफाई के लिए इस बार दो सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों और 40 पालिका कर्मियों को लगाया गया है। एक सफाई एवं खाद्य निरीक्षक 20 पालिका कर्मियों के साथ जलभराव से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए अपनी देखरेख में नालों की सफाई का कार्य करा रहे हैं। नालों की सफाई में दो बड़ी जेसीबी, एक छोटी जेसीबी, एक पोकलैंड लगाया गया है। मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन जलभराव से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए तैयारियां अधूरी हैं।
पानी निकासी के इंतजाम न होना सबसे बड़ी समस्या
सफाई एवं खाद्य निरीक्षक रविशेखर का कहना है कि शहर में पानी निकासी का इंतजाम न होना जलभराव का मुख्य कारण है। गोरा बाजार, धमसी राय, शक्ति नगर, सोनिया नगर, जफरनगर, फातिमा कॉलोनी, आजाद नगर, अंबेडकर नगर समेत ज्यादातर ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पर तालाब और नहर की जमीन पर लोगों ने मकान बना लिया है।
नालों की सफाई के बाद भी पानी निकासी नहीं होने के कारण जलभराव हो जाता है। जलभराव से तभी राहत मिल पाएगी, जब मकान बनाते समय पानी निकासी का इंतजाम होगा। रही बात नालों की साफ-सफाई की तो ऐसा कार्य कराया जा रहा है।
खबर छपी तो नालों की कराई गई सफाई
16 जून के अंक में अमर उजाला ने गंदगी से पटे नाले... बारिश में डूबेंगी सड़कें शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेते हुए पालिका की टीम ने इंदिरा नगर, अयोध्यापुरी, सत्यनगर में जाकर नालों की जेसीबी से सफाई कराई। अन्य मोहल्लों में भी नालों की सफाई कराई गई। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) स्वर्ण सिंह का कहना है कि नालों की सफाई का कार्य तेजी के साथ कराया जा रहा है। बारिश से पहले 90 फीसदी सफाई का कार्य हो चुका है। नालों की सफाई में दो सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों की अगुवाई में दो टीमें लगाई गई हैं।