रायबरेली। विद्युत उपकेंद्र उतरपारा से जुड़े ग्रामीणों को बिजली संकट से राहत नहीं मिल पा रही है। मधुपुरी फीडर से जुड़े 60 गांवों की बिजली आपूर्ति बुधवार दोपहर से ठप है। इससे जहां धान की रोपाई बाधित है, वहीं पेयजल संकट भी गहरा गया है। जर्जर और लटकते तार आपूर्ति में रोड़ा बन रहे हैं। यह समस्या एक सप्ताह से है।
मधुपुरी फीडर से खनुवा, नथईपुर, बाबा का पुरवा, सूरजकुंडा, उतरपारा, सुलखियापुर, मधुपुरी, सुल्तानपुर आइमा, बेंद, पूरे निकासू, बैसन का पुरवा, अजरहा व सेवकी का पुरवा समेत 60 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है।
बुधवार दोपहर 12 बजे बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इसके बाद कई बार ट्रिपिंग हुई, लेकिन सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। रात भर बिजली आपूर्ति ठप होने से घरों में लगे इनवर्टर बंद हो गए। बृहस्पतिवार देर शाम तक आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी।
किसान अशोक कुमार व किशोर यादव ने बताया कि धान की रोपाई करनी थी। श्रमिक भी बुला लिए थे, लेकिन पानी के अभाव में सभी को वापस करना पड़ा। व्यापारी हरिकिशन, नंद किशोरी व शिवबालक गुप्ता ने बताया कि बिजली नहीं आने से कारोबार पर असर पड़ रहा है। अधीक्षण अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि फॉल्ट की जानकारी हुई है। स्टाफ को बिजली बहाल करने के लिए लगाया गया है।
नहीं कराया गया मरम्मत कार्य
बिजली की लाइन कई दशक पहले बनाई गई। करीब 10 साल से मरम्मत कार्य नहीं कराया गया। पेड़ की डालियों के बीच निकले तार अक्सर टूट जाते हैं। लटकते तारों के बीच खंभे नहीं लगाए गए हैं। इससे तार जमीन छू रहे हैं। कई जगह खंभे टेढ़े हैं, जिन्हें बदलवाया नहीं जा रहा है। मधपुरी गांव के निकट डबल खंभों पर रखा ट्रांसफार्मर स्टे वायर के सहारे है, जो कभी भी गिर सकता है।
एक लाइनमैन के सहारे फीडर
मधुपुरी फीडर की लंबाई काफी ज्यादा है। इसकी देखरेख के लिए केवल एक लाइनमैन रखा गया है। इस वजह से फॉल्ट खोजने में पूरा दिन बीत जाता है। लाइनमैन के सहयोग के लिए रखे गए कर्मचारी केवल औपचारिकता करते हैं, जिन्हें खंभे पर पढ़ना तक नहीं आता है। यही वजह है कि लोगों को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।