रायबरेली। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी। साथ ही पीड़िता की विरोध याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला वर्ष 2012 का है। वादी ने त्रिभुवन सिंह, संत बहादुर सिंह, नेहरू और कमलेश समेत अन्य पर दुष्कर्म और हत्या के प्रयास का आरोप लगाया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उन्हें अगवा कर दुष्कर्म किया गया और सोनभद्र में मरा समझकर छोड़ दिया गया। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद ही मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी, जिसकी जानकारी पीड़िता को नहीं मिली। इस मामले में आरोपियों ने लोक अदालत में एकपक्षीय आदेश भी प्राप्त कर लिया था। पीड़िता ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मामले की जानकारी हासिल की। न्यायालय ने पाया कि विवेचक ने बिना निष्पक्ष जांच के अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। अब मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 17 अगस्त 2026 को सुनवाई होगी।