डलमऊ के संकटमोचन घाट पर गंगा का बढ़ता जलस्तर।
डलमऊ। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे कस्बे और बाढ़ पीड़ित गांवों के लोगों में बाढ़ का भय सताने लगा है। कृषि भूमि और हजारों बीघे फसलें जलमग्न होने से बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। कटरी क्षेत्र के गांवों में खेतों की तरफ जाने वाले रास्तों में पानी भर गया है, जिससे लोग जान जोखिम में डालकर आते-जाते हैं।
केंद्रीय जल आयोग डलमऊ ने रविवार को गंगा का जलस्तर 98.790 मीटर मापा, जो खतरे के निशान 99.360 मीटर से मात्र 56 सेंटीमीटर दूर है। तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि एक सप्ताह से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार और यात्रियों को परेशानी हो रही है। स्नान घाट जलमग्न हो गए हैं और पर्याप्त घेराबंदी न होने से अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
बाढ़ पीड़ित गांवों में हजारों बीघे धान और सब्जी की फसलें डूब गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उपजिलाधिकारी डलमऊ प्रीति सिंह ने बताया कि व्यवस्थाएं की गई हैं। गंगा कटरी क्षेत्र को जाने वाले रास्ते पर नाव की व्यवस्था की गई है। स्नान घाटों पर घेराबंदी भी कराई गई है और बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
कई गांवों पर बाढ़ का खतरा
सरेनी। गंगा का जलस्तर बढ़ने से कुटिया एहतमाली, पूरे भुल्ली, पूरे सुकरू, पूरे राम प्रसाद, पूरे अहिरन गांव पानी से घिर गए हैं। पूरे शुकरू से पूरे लाल साहब जाने वाला खड़ंजा मार्ग पानी भरने से बंद हो गया है। अवधपाल ने बताया कि लोग दूसरे रास्ते से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। कटरी क्षेत्र में बोई धान की फसल में पानी भर गया है।
गेंगासो में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे संकटा माता मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। तहसीलदार पवन कुमार यादव ने बताया कि जलस्तर बढ़ रहा है, पर बाढ़ का पानी गांवों से दूर है। प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है और नावें भी मंगा ली गई हैं।