जिले में पेंशन की चल रही योजना का हाल काफी खराब है। महज समाजवादी पेंशन
के लिए करीब एक लाख 50 हजार आवेदन आए थे। इसमें से कुछ ही लोगों को लाभ मिल
सका।
अन्य सभी आवेदन को यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि लक्ष्य बढ़ने पर ही
लाभ मिलेगा। इसी तरह निशक्त पेंशन के लिए करीब एक हजार, विधवा में तीन
हजार, वृद्धा में आठ से 10 हजार से अधिक आवेदन दफ्तर की फाइलों में कैद
हैं।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे गरीब दफ्तर के चक्कर लगाने के बाद थक-हारकर घर
में बैठ गए। वहीं उनके आवेदन तक गुम हो गए।
खीरों ब्लॉक के नई बाजार की कलावती का। 70 वर्ष की उम्र में आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विधवा होने के साथ वृद्ध भी हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
यहीं की 62 वर्षीय राधा का कहना है कि एक बार पेंशन मिली। इसके बाद क्यों बंद हो गई, इसकी जानकारी के लिए दौड़भाग की, पर इसका पता नहीं चल सका।
खीरों कस्बा के धानू को योजना का लाभ नहीं मिला। उसका कहना है कि 80 फीसदी निशक्त है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसी तरह निशक्त सूरज का कहना है कि आठ महीने आवेदन के हो चुके हैं, फॉर्म का ही पता नहीं। दफतर के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने पीड़ा नहीं सुनी।
अमावां ब्लॉक के उफरामऊ निवासी रचना शुक्ला का कहना है कि विधवा होने के साथ वृद्ध भी है। 2015 में आवेदन किया। कुछ नहीं मिला।
इसी तरह कांशीराम कॉलोनी की विधवा शिवकुमारी को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आवेदन में पांच सौ रुपये खर्च हो गए। पेंशन अभी तक नहीं मिली। बाबू इधर से उधर दौड़ाता रहता है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी अमित सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से बजट मिलने के अनुसार पात्रों को लाभ दिलाया जाता है। वर्तमान में जो भी आवेदन है, उनकी जांच के बाद बजट की डिमांड की जाएगी।