रायबरेली। ये चंद केस सिर्फ नमूना मात्र हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल के ओपीडी कक्षों से बाहर निकलने वाले मरीजों के हाथ में बाजार से खरीदने के लिए दवा की छोटी परची नजर आई। सरकार का दावा है कि अस्पताल में मरीजों को सारी दवाएं मुफ्त दी जाएं, लेकिन यहां मुफ्त दवा के दावे हवा-हवाई हैं।
मरीज बाजार से चार सौ से लेकर आठ सौ रुपये तक की दवाएं खरीदने का मजबूर हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। हड्डी रोग विभाग, मेडिसिन विभाग सहित सभी विभागों की ओपीडी में सरकारी दावों को धता बताकर मरीजों से मोनोपोली और महंगी दवाएं बाजार से खरीदवाई जा रही है। डीएम से लेकर सीडीओ तक ने दवा के इस कारोबार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। चिकित्सक अपनी जेब गर्म कर रहे हैं।
स्टोर में 230 प्रकार की दवाएं उपलब्ध
जिला अस्पताल के स्टोर में 287 में 230 प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। दवा काउंटरों पर मरीजों को दवाएं भी मिल रही हैं, लेकिन मरीजों को बाजार से भी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। चिकित्सक बाजार से दवाएं मंगवाने के बाद ही मरीजों को अस्पताल की दवाएं दे रहे हैं।
जन औषधि केंद्र की दवाएं डॉक्टरों को न मंजूर
जिला अस्पताल परिसर में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी संचालित है। यदि मरीज ने यहां से दवाएं खरीद ली और उसे लेकर चिकित्सक के पास पहुंच गए तो उन्हें खरी-खोटी सुनने को मिलती है। दवाओं को वापस कराकर सेटिंग वाले मेडिकल स्टोरों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है। ऐसे में मरीजों के हिस्से में परेशानी ही आ रही है।
चार दुकानों पर मरीजों का लगता मेला
अस्पताल चौराहे पर स्थित दवा की चार दुकानों पर सुबह आठ से दोपहर ढाई बजे तक दवा खरीदने के लिए मरीजों का मेला देखा जा सकता है। वैसे चौराहे पर 20 से अधिक दवा की दुकानें हैं, लेकिन जिन दुकानदारों की सेटिंग डॉक्टरों से नहीं है, उनकी दुकान पर मरीज नहीं पहुंचते हैं। कारण, मोनोपोली की दवाएं होने के कारण दूसरी दुकानों पर नहीं मिल पाती हैं।
बाजार से खरीदी 460 रुपये की दवा
करीब 40 किमी दूर जलालपुर धई से 58 वर्षीय मरीज राजेंद्र कुमार जिला अस्पताल में चिकित्सीय सलाह लेने आए थे। डॉक्टर ने उन्हें 460 रुपये की दवा बाजार से खरीदने के लिए लिख दी। डॉक्टर ने कहा कि दवा खरीदकर लाकर दिखाओ। राजेंद्र का कहना है कि उन्हें पेट में जलन की समस्या थी। किसी तरह बाजार से दवा खरीदी है। कुछ दवा अस्पताल से मिली है, लेकिन बाकी दवाएं बाजार से खरीदकर लाए हैं।
साथी से रुपये लेकर खरीदनी पड़ी दवा
बुखार और शरीर में दर्द की समस्या होने पर बरदर गांव के रामकुमार चिकित्सीय सलाह लेने के लिए जिला अस्पताल आए थे। डॉक्टर ने उन्हें 390 रुपये की दो दवाएं बाजार से खरीदने के लिए परची थमा दी। राम कुमार के पास रुपये नहीं थे। उनके साथ आए व्यक्ति से उन्होंने रुपये लेकर बाजार से दवाएं खरीदीं। राम कुमार का कहना है कि सोचा थी कि अस्पताल में फ्री में दवा मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। सभी डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीजों को अस्पताल से ही दवाएं देंगे। इसके बाद भी बाजार से दवाएं लिखने वाले चिकित्सकों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल