ऊंचाहार (रायबरेली)। कोरोना संकट में बिजली की खपत कम होने के कारण एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना ने कोयले की मांग घटा दी है। खपत कम होने और पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने का दावा भी एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। आधी क्षमता से यूनिटों को संचालित कराया जा रहा है।
करीब 1550 मेगावाट क्षमता वाली ऊंचाहार परियोजना मार्च से आधे भार पर चल रही है। इसका प्रमुख कारण देश के बड़े कारखानों का बंद होना बताया जा रहा है जिसके कारण बिजली की मांग कम हो गई है। लॉकडाउन के दौरान एनटीपीसी ने ऊंचाहार परियोजना में स्थापित 210 मेगावाट उत्पादन क्षमता की चार इकाइयों को बंद कर दिया था। शेष जो यूनिटें चल रही थी, उनको भी आधे भार पर चलाया जा रहा था।
लॉकडाउन खुलने के बाद बंद इकाइयों को चालू कर दिया गया लेकिन बिजली की मांग न होने के कारण सभी इकाइयों को आधे भार पर चलाया जा रहा है। परियोजना में प्रतिदिन करीब 15500 मीट्रिक टन कोयले की खपत हो रही है जबकि सभी यूनिटें पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन करती हैं तो एक दिन मे करीब 24 हजार मीट्रिक टन कोयले की खपत होती है।
परियोजना में इस समय करीब सात लाख 15 हजार मीट्रिक टन कोयला का भंडारण है। कोल इंडिया लिमिटेड से अनुबंध के अनुसार ऊंचाहार को प्रतिदिन छह रैक कोयले की आपूर्ति होती रही है लेकिन अब इसे घटकर एक से दो रैक कर दिया गया है।
एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि अभी तक लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर यूनिटें बंद चल रही थीं जिसकी वजह से हमारे पास कोयले का पर्याप्त भंडारण है और जितनी आवश्यकता होती है उसी हिसाब से कोयला आता है। अभी पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर पूरी क्षमता से कोयले की डिमांड की जाएगी।