नोटबंदी के बाद से जिले में जमीन खरीदने का धंधा मंदा हो गया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 65 फीसदी रजिस्ट्री संख्या घट गई है। 50 दिन में केवल एक बड़ी रजिस्ट्री अब तक हो सकी है। पिछले साल नवंबर, दिसंबर में राजस्व लक्ष्य 90 फीसदी तक पूरा हो चुका था।
लेकिन इस साल 35 फीसदी ही राजस्व का लक्ष्य पूरा किया जा सका है। विभागीय अफसरों का मानना है कि अभी कुछ माह ऐसी ही जमीन खरीद-फरोख्त के हालात रहेंगे। जिले में सदर निबंधन कार्यालय सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला कार्यालय है।
लेकिन यहां भी नोटबंदी के बाद रजिस्ट्री होने की दर में बड़ी कमी आ गई है। 8 नवंबर के पहले यहां अमूमन हर रोज 25 से 30 रजिस्ट्री होती थीं। इनमें मकान, प्लाट, खेती की जमीन आदि के निबंधपत्र शामिल होते थे। अब नोटबंदी के बाद यहां भी सन्नाटा पसरा रहता है।
अब हर दिन एक कार्यालय में दो रजिस्ट्री हो रही हैं। रजिस्ट्री बैनाम लेखक, प्रापर्टी डीलर, विभागीय कर्मचारी-अधिकारी सभी का कहना है कि अभी हालात सुधरने में काफी वक्त लगेगा। शहर के अलावा डलमऊ, ऊंचाहार, महराजगंज, सलोन व लालगंज के निबंधन कार्यालयों में भी कमोवेश यही हाल दिख रहा है।
महराजगंज निबंधन कार्यालय में 26 दिसंबर को दयानंद पीजी कॉलेज संस्था की ओर से दो रजिस्ट्री कराई गई। इनमें 63 लाख रुपये के ई स्टांप लगाए गए। जिले में एक बड़ी रजिस्ट्री होने से राजस्व में कुछ इजाफा हो गया।
सदर तहसील में नवंबर में 457 लाख रुपये राजस्व लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 44 लाख का राजस्व आया। वहीं दिसंबर में 121 लाख के सापेक्ष 83 लाख रुपये ही राजस्व मिला। महराजगंज में नवंबर में 92 लाख के सापेक्ष 51 लाख व दिसंबर में 125 लाख के सापेक्ष 34 लाख आया।
लालगंज में नवंबर में 96 लाख के सापेक्ष 50 लाख व दिसंबर में 127 के सापेक्ष 33 लाख मिला। डलमऊ में नवंबर में 32 लाख के सापेक्ष 13 लाख व दिंसबर में 45 लाख के सापेक्ष मात्र 11 लाख राजस्व मिला। ऊंचाहार में नवंबर में लक्ष्य 40 लाख की जगह 22 लाख राजस्व आया।
जबकि सलोन में नवंबर के लक्ष्य 77 लाख के सापेक्ष महज 40 लाख और दिसंबर में 103 लाख के सापेक्ष मात्र 03 लाख राजस्व आया। प्रापर्टी डीलर शिव कुमार अग्रहरि व राजू सिंह, सूरज सोनकर का कहना है कि नोटबंदी के चलते धंधा मंदा है।
लोग जमीन व मकान खरीदने के लिए नहीं आ रहे हैं। नोटबंदी से पहले लोग आते थे और जमीन-मकान की खरीद-फरोख्त करते थे। दिक्कत आ रही है कि जमीन खरीदने के लिए लोगों के पास धन नहीं है। धन होने पर ही इस धंधे में तेजी आएगी।
सदर निबंधन नवीन सिंह ने कहा कि कार्यालय में नेाट बंदी से पहले अमूमन रोज 25 रजिस्ट्री जमीन, मकान, प्लॉट की होती थीं। अब नोटबंदी के बाद से जमीन खरीद फरोख्त की रजिस्ट्री संख्या घटकर दो से पांच पर आ गई हैं। लोगों में कैश की कमी के कारण प्रापर्टी खरीदने में रुचि नहीं ले रहे हैं।