रायबरेली। जिले में संचालित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ ही डाक्टरी की पढ़ाई भी बेहतर हुई है।
प्रदेश के इस पहले एम्स में वर्ष 2027 तक 250 छात्र-छात्राएं पढ़ाई पूरी कर पेशेवर डॉक्टर बनेंगे। इसमें सबसे पहले 50 विद्यार्थी साल 2024 में और इसके बाद वर्ष 2026 व 2027 में सौ-सौ छात्र एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर डॉक्टरी पेशे से जुड़ेंगे। इसके साथ ही संस्थान में डाक्टरी की पढ़ाई को और विस्तार दिए जाने की कवायद भी चल रही है।
इसके तहत ही अगले शैक्षिक सत्र से एमबीबीएस बैच की छात्र संख्या को सौ से बढ़ाकर दो सौ किए जाने पर भी गहन मंथन हो रहा है। ताकि दिल्ली जैसे एम्स की तरह ही बेहतर इलाज के साथ ही यहां के पढ़ाई के स्तर को भी वैसा ही गुणवत्तायुक्त बनाया जा सके।
जिले के एम्स में 29 अगस्त 2019 में एमबीबीएस के पहले बैच की डाक्टरी की पढ़ाई के लिए 50 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया था।
प्रवेश लेने वाले यह छात्र वर्ष 2024 में एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रदेश में एम्स से डाक्टरी की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा पेशे से जुड़ने वाले पहले बैच के डाक्टर बनने की उपलब्धि हासिल करेंगे। संस्थान के दूसरे बैच के 100 स्टूडेंट्स की पढ़ाई वर्ष 2026 और तीसरे बैच के सौ बच्चों की पढ़ाई 2027 में पूरी होगी। गुरुवार को एमबीबीएस का तीसरे बैच का शुभारंभ हुआ।
इस तरह साल 2024 के बाद तीन साल के अंदर एम्स से पढ़ाई पूरी करने वाले 250 डॉक्टर देश व प्रदेश में संस्थान का नाम रौशन करेंगे। इलाज के साथ ही मेडिकल की पढ़ाई को भी गुणवत्ता युक्त बनाने के साथ और विस्तारित करने की कोशिश में भी संस्थान प्रशासन जुटा है।
इसके चलते ही अगले शैक्षिक सत्र से एमबीबीएस छात्रों के प्रवेशार्थियों की संख्या को सौ से बढ़ाकर दो सौ किए जाने की कवायद भी जोरों पर है।
पढ़ाई के साथ ही एम्स में विशेषज्ञ जांचों के साथ ही जटिल सर्जरी का कार्य शुरू करने के साथ ही अगले एक माह में कई नए ऑपरेशन थियेटर भी क्रियाशील हो जाएंगे। साथ ही मरीजों को भर्ती करके इलाज की बेहतर सुविधा देने के लिए 200 बेड का हॉस्पिटल भी संस्थान परिसर में क्रियाशील हो चुका है।