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Raebareli News: विवेचना में लापरवाही, बैंक अफसर के हत्यारोपी बरी

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हत्या के आरोप से बरी लोजपा नेता नगीना ​सिंह। - फोटो : हत्या के आरोप से बरी लोजपा नेता नगीना ​सिंह।
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रायबरेली। कानपुर जिले के रहने वाले बैंक अधिकारी की हत्या के मुकदमे में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट, चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश अमित कुमार पांडेय ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नगीना सिंह सहित तीनों अभियुक्तों को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया है। वर्ष 2022 के चर्चित हत्याकांड में मृत बैंक अधिकारी की पत्नी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान लोजपा नेता व दो अन्य को आरोपित किया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस साक्ष्यों की कड़ियां मुकदमे से जोड़ने में विफल रही। विवेचना में लापरवाही की। इसका लाभ अभियुक्तों को मिला।
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कानपुर जिले के चकेरी थाना क्षेत्र के 143बी भवानी नगर देहली सुजानपुर निवासी जय प्रकाश पाल मिलएरिया थाना क्षेत्र के 1435 डी श्याम नगर में विपिन कुमार के घर में किराये पर रहते थे। वे बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा डीह में सहायक प्रबंधक के पद पर तैनात थे। 11 जनवरी 2022 की रात गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। मामले में उनकी पत्नी आरती पाल ने मिलएरिया थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
वादिनी का आरोप था कि 12 जनवरी 2022 को मकान मालिक ने फोन करके सूचना दी कि उनके पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यहां आने पर मकान मालिक के गोदाम के पास कार में पीछे की सीट पर पति का शव मिला। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। इस दौरान मिल एरिया थाना क्षेत्र के आईटीआई कॉलोनी निवासी आकाश सिंह उर्फ सनी सिंह और सलोन कोतवाली क्षेत्र के दरसवां गांव निवासी दयाराम पासी को गिरफ्तार किया था। बाद में शहर के सम्राट नगर निवासी लोजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष धनगीना सिंह ने न्यायालय में समर्पण कर दिया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि रुपयों के लेनदेन में बैंक अधिकारी की हत्या कराई गई थी। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट, चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश अमित कुमार पांडेय ने मुकदमे की सुनवाई करते हुए नगीना सिंह, आकाश सिंह उर्फ सनी सिंह, दयाराम पासी को दोषमुक्त कर दिया।
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अदालत ने की तल्ख टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि पुलिस ने अपनी विवेचना में लिखा कि नगीना सिंह ने जमीन का बैनामा करने के लिए बैंक अधिकारी से 25 लाख रुपये लिए और बैनामा कराने का दबाव बनाने पर हत्या करा दी। न्यायालय ने कहा कि न्यायालय में कोई गवाह नहीं आया, जिसने कहा हो कि उसके सामने बैंक अधिकारी ने नगीना सिंह को पैसा दिया। मोबाइल पर कथित बातचीत पर आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 25 लाख रुपये में एक रुपये की भी बरामदगी नहीं दिखाई। पुलिस ने ऐसी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की जिससे स्पष्ट हो कि शव से जो गोली निकली है, वह बरामद शस्त्रों से चलाई गई थी। पूरी विवेचना लापरवाही भरे तरीके से मुखबिर की सूचना पर की गई। पुलिस साक्ष्यों की कड़ियां मुकदमे से जोड़ने में विफल रही।
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