श्रम विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी भट्ठों में बंधुवा मजदूरों से काम लेने की प्रथा रुकने का नाम नहीं ले रही है। सतांव ब्लॉक क्षेत्र के ताज ब्रिक फील्ड में भी श्रमिकों को बंधुवा बनाने का मामला सामने आया है। यहां चित्रकूट से आए 14 श्रमिकों से जबरन काम लिया जा रहा था।
डीएम की सख्ती के बाद मंगलवार को प्रशासन और श्रम विभाग की टीम ने भट्ठा पर छापा मारा तो हड़कंप मच गया। बवाल या विरोध से निपटने के लिए पुलिस भी बुलाई गई। टीम ने सभी बंधुवा 14 श्रमिकों को मुक्त कराया। उन्हें गांव भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
सतांव ब्लॉक क्षेत्र के बल्ला बरौला में स्थित ताज ब्रिक फील्ड में चित्रकूट से करीब 60 श्रमिक काम करने के लिए बुलाए गए थे। इनमें पुरुष और महिला दोनों श्रमिक शामिल हैं। बताते हैं कि 14 श्रमिकों को बंधुवा बनाकर उनसे काम लिया जा रहा था। रुपये मांगने पर उनके साथ अभद्रता की जाती थी।
इससे परेशान श्रमिकों ने कई बार काम छोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया गया। किसी ने इसकी शिकायत डीएम सूर्यपाल गंगवार से कर दी। डीएम ने तहसीलदार सदर सौरभ शुक्ला को जांच के निर्देश दिए।
मंगलवार को तहसीलदार सदर सौरभ शुक्ला ने सहायक श्रमायुक्त अमित मिश्र टीम के साथ छापेमारी की। यहां श्रमिकों से पूछताछ और जांच हुई तो बंधुवा मजदूरी कराने की बात सामने आई। इस दौरान अटौरा चौकी इंचार्ज सुरेश कुमार भी फोर्स के साथ मुस्तैद थे।
उधर, भट्ठा संचालक मोहम्मद जफरुल ने बंधुवा मजदूरी कराने से इंकार किया। उसका कहना है कि बेवजह आरोप लगाया जा रहा है। भट्ठे में काम करने के लिए ये सभी 14 श्रमिक अपने पूरे परिवार के साथ आए थे। इनमें उनके मासूम बच्चों को मिलाकर करीब 37 लोग शामिल हैं।
चित्रकूट जिले के मानिकपुर तहसील क्षेत्र के हरिजनपुर गांव निवासी अश्वनी, श्यामलाल, राम नरेश, मंजू, जागेश्वर, चुन्नूलाल, गरबी तहसील क्षेत्र के चौरा निवासी राजू समेत अन्य बंधुवा श्रमिक भट्ठे में हो रहे उत्पीड़न से त्रस्त थे।
सभी बच निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे। टीम जांच करने पहुंची तो उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई दी। बंधुवा मजदूरों ने बेबाकी से और निडर होकर अपने उत्पीड़न की दास्ता अफसरों को सुनाई। तहसीलदार सदर सौरभ शुक्ला ने बताया कि ताज ब्रिक फील्ड में सात जोड़ी श्रमिकों को बंधक बनाया गया था।
एक जोड़ी में पत्नी-पत्नी दोनों शामिल होते हैं। पूछताछ में श्रमिकों ने पांच माह से बंधक बनाए जाने की बात कही। सभी को मुक्त कराकर उनके गांव भेजने की व्यवस्था की जा रही है।