रायबरेली। अपर निदेशक के आदेश पर हुई जांच में दोषी पाए गए ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक (बीसीपीएम) रामबरन रावत को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बीसीपीएम ने स्वयं की फर्म बनाकर डीह और नसीराबाद सीएचसी से लाखों का भुगतान करा लिया था। जांच में पुष्टि होने के बाद डीएम के आदेश पर सीएमओ ने आदेश जारी करके उसे सेवा से बाहर कर दिया है।
डीह सीएचसी में तैनात रहे बीसीपीएम रामबरन रावत ने एमएस लक्ष्य इंटरप्राइजेज नाम से फर्म बनाई थी। इसके जरिये ग्रामीण अस्पतालों को रोगी कल्याण समिति के माध्यम से रोगियों को सुविधा मुहैया कराने के लिए मिलने वाले बजट में खेल किया था। डीह के साथ ही नसीराबाद सीएचसी से बीसीपीएम ने लाखों का भुगतान अपनी फर्म के नाम करवा लिया था।
मामले की शिकायत अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीपी गुप्ता से की गई थी। अपर निदेशक के आदेश पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई थी। जांच में बीसीपीएम दोषी पाया गया था। तैनाती वाली सीएचसी के अलावा नसीराबाद अस्पताल से भी अपनी फर्म के नाम भुगतान करा लिया था।
नियमानुसार कर्मचारी अपने नाम की फर्म में रोगी कल्याण समिति का बजट भुगतान नहीं करा सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद डीएम हर्षिता माथुर ने बीसीपीएम की संविदा को समाप्त करने के आदेश दिए। सीएमओ डॉ. नवीनचंद्रा ने पत्र जारी कर उसे सेवा से बाहर कर दिया है।
खीरों की स्टॉफ नर्स की संविदा भी समाप्त
जिले के खीरों सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स पूर्णिमा सिंह की संविदा को भी समाप्त कर दिया गया है। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी मिलने के बाद डीएम ने स्टाफ नर्स की संविदा को खत्म करने का आदेश दिया है। सीएमओ ने आदेश जारी करके संविदा कर्मचारी को सेवा से बाहर कर दिया है।
जांच में दोषी मिलने के बाद डीह के ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक और खीरों सीएचसी की स्टाफ नर्स की संविदा खत्म कर दी गई है। डीएम के अनुमोदन के बाद सीएमओ के स्तर से आदेश जारी किया गया है।
- डॉ. शरद कुशवाहा, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन