रायबरेली। बजट कम, खर्च ज्यादा तो कैसे मिले बच्चों को पौष्टिक भोजन। दो साल में महंगाई डेढ़ से दोगुनी बढ़ गई, लेकिन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत मिलने वाले भोजन की कन्वर्जन कास्ट पुरानी है।
दो साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन कन्वर्जन कास्ट नहीं बढ़ाई गई। डेढ़ से दोगुनी बढ़ी महंगाई से पुरानी कन्वर्जन कास्ट से भोजन बनवाना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में गुणवत्ता और पौष्टिकता की उम्मीद रखना बेमानी है। कहीं सामग्री में कटौती होती या फिर मानकों को नजरअंदाज किया जाता है। गेहूं और चावल की तो आपूर्ति हो जाती है, लेकिन खाना बनाने के लिए सब्जी, दाल, तेल, मसाले, दूध, फल सामग्री की भी जरूरत पड़ती है।
बीते दो सालों में इन वस्तुओं के दाम काफी अधिक बढ़ गए हैं। रसोई गैस के दाम भी आसमान छू रहे हैं। बजट भी देर-सवेर आता है। ऐसे में विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन दे पाना मुश्किल होता जा रहा है। इसको लेकर शिक्षक और अभिभावक चिंतित हैं, लेकिन शायद इसको लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
विद्यालयों की संख्या- 2705
बच्चों की संख्या- 2.97 लाख
कन्वर्जन कास्ट-प्रति छात्र
प्राइमरी में 4.97 रुपये
जूनियर में 7.45 रुपये
सामग्री के दाम : दो साल पहले और अब
सामग्री पहले अब
रिफाइंड 100 रुपये 185 रुपये
अरहर दाल 80 रुपये 105 रुपये
सोयाबीन 50 रुपये 75 रुपये
सरसों तेल 100 रुपये 200 रुपये
दूध 30 रुपये 50 रुपये