रायबरेली। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1.82 लाख से अधिक लाडलों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में दाल वितरित करने के लिए जिले के 134 समूहों के खाते में 29.48 लाख रुपये भेजे गए है। समूह संचालकों को दाल खरीद कर लाभार्थियों में बांट कर रिपोर्ट देने के आदेश भी दिए गए हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में संचालित 2833 आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों में पोषाहार का वितरण किया जाता था। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में भी पोषाहार बांटा जाता था।
शासन ने पोषाहार का वितरण बंद कर दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से ड्राई राशन के वितरण के बाद देशी घी भी आ चुका है। स्वयं सहायता समूहों को ही दाल का वितरण भी केंद्रों पर करना है। पूर्व में शासन स्तर से 590 समूहों में सीधे 1.29 करोड़ रुपये भेजे गए थे।
शासन से 1.02 करोड़ रुपये जिला मुख्यालय को देकर शेष समूहों को धनराशि देकर दाल का वितरण करवाने के आदेश दिए। 134 स्वयं सहायता समूहों को 29.48 लाख रुपये दिए गए हैं। समूहों को दाल क्रय करके लाभार्थियों में वितरित करने के आदेश दिए गए हैं। शेष धनराशि भी समूहों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी समूहों के खातों में धनराशि पहुंच जाएगी।
उम्र के हिसाब से ड्राई राशन का वितरण
एनआरएलएम की जिला मिशन प्रबंधक शैलेश त्रिपाठी कर कहना है कि छह माह से तीन माह के बच्चे को प्रतिमाह एक किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं के साथ 750 ग्राम दाल मिलनी है। तीन महीने में एक बार 450 ग्राम देसी घी और 400 ग्राम सूखा दूध भी मिलेगा। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों (छह माह से तीन वर्ष तक) को प्रतिमाह अनाज के साथ दाल और तीन माह में एक बार 900 ग्राम देशी घी व 750 ग्राम सूखा दूध देने की व्यवस्था है। गर्भवती व धात्री महिलाओं एवं 11 से 14 वर्ष की उम्र की किशोरियों को राशन के साथ 750 ग्राम दाल, तीन महीने में एक बार 450 ग्राम देशी घी, 750 ग्राम सूखा दूध मिलना है।
जिले में गेहूं, चावल के साथ ही घी का वितरण हो चुका है। दाल के लिए कुछ समूहों को बजट पहले दिया गया था। 134 समूहों को 29.48 लाख और भेजे गए हैं। शेष बचे समूहों को भी बजट भेजा जा रहा है। नियमानुसार दाल के वितरण के आदेश दिए गए हैं।
- शोभनाथ चौरसिया, डीडीओ/ डीसी (एनआरएलएम)