रायबरेली। हिंदू धर्म की आस्था, परंपरा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना का प्रतीक वट सावित्री अमावस्या पर शनिवार को सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की। सोलह शृंगार और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने बरगद की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
सुहागिनों ने व्रत रखा। उन्होंने वट वृक्ष को फल, फूल, नारियल, सिंदूर, धूप-दीप और अक्षत अर्पित किए। इसके बाद महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटा और अपने सुहाग की रक्षा एवं पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की।
पूजन के उपरांत महिलाओं ने एकत्र होकर पतिव्रता माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा का श्रवण किया। कथा में बताया गया कि माता सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और अटूट संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।
कथा सुनने के बाद महिलाओं ने आरती उतारी और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की शुभकामनाएं दीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इसकी दीर्घायु और विशालता को वैवाहिक जीवन की स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति के लिए लंबी उम्र और परिवार के कल्याण की कामना करती हैं।
इस बार वट सावित्री व्रत शनिवार को शनैश्चर अमावस्या के दुर्लभ संयोग में मनाया गया। इसे ज्योतिष व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है।