रायबरेली। पुलिस लाइंस में रविवार को फायरिंग अभ्यास में अपराधियों से मोर्चा लेने वाले निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों को फायरिंग करने में ही पसीना छूट आया। धांय-धांय की आवाज से पुलिस लाइंस गूंज रहा था। कइयों का निशाना चूक रहा था तो कइयों के हाथ कांपते रहे।
कुछ ऐसे रहे, जिन्हें वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों का सहारा लेना पड़ रहा था। साल में एक बार पुलिस लाइंस में फायरिंग करने का अभ्यास कराया जाता है। इसका मकसद रहता है कि अपराधियों से मोर्चा लेते वक्त पुलिस का निशाना सटीक बैठे।
रविवार से इसकी शुरुआत कराई गई। अभ्यास के दौरान फायरिंग की जो तस्वीर दिखी, उसमें कुछ ऐसे निरीक्षक, दरोगा नजर आए, जो नौ एमएम की पिस्टल से फायरिंग करते हुए खुद को असहज महसूस कर रहे थे। फायरिंग करते समय हाथ कांप रहे थे।
कइयों का निशाना भी सटीक नहीं बैठ रहा था। कुछ ऐसे दरोगा ऐसे भी रहे, जिन्हें फायरिंग अभ्यास करने में दूसरे पुलिस कर्मियों की मदद लेनी पड़ी। भदोखर थानेदार राम आशीष उपाध्याय, खीरों थानेदार राजेश सिंह, किला बाजार चौकी प्रभारी नारायण कुशवाहा, मुराईबाग चौकी प्रभारी देवेंद्र कुमार अवस्थी, दरोगा राजेश यादव समेत करीब 50 पुलिस कर्मियों ने फायरिंग अभ्यास में भाग लिया।
पुलिस लाइंस में एक बार में चार निरीक्षकों-उपनिरीक्षकों को फायरिंग का अभ्यास कराया गया। एक पुलिस कर्मी को 30 राउंड फायरिंग कराई गई। थाने से पहुंचने से पहले सभी की पिस्टल की साफ-सफाई कराई गई, ताकि फायरिंग के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो।
हर साल पुलिस लाइंस में वार्षिक फायरिंग अभ्यास कराया जाता है। इस बार भी सभी निरीक्षकों-उपनिरीक्षकों से फायरिंग का अभ्यास कराया जा रहा है। इसकी शुरुआत करा दी गई है। हर रविवार को ही फायरिंग का अभ्यास कराया जाएगा। फायरिंग अभ्यास से पुलिस कर्मी पिस्टल से फायरिंग करने में और निपुण होते हैं। जरूरत के समय हाईटेक अपराधियों से मुकाबला करते हैं।- बृजेंद्र सिंह, प्रतिसार निरीक्षक, पुलिस लाइंस