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Raebareli News: लखनऊ के दवा सप्लायरों के कब्जे में जिला अस्पताल की ओपीडी

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जिला अस्पताल के काउंटर पर दवा लेने के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं। - फोटो : जिला अस्पताल के काउंटर पर दवा लेने के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं।
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रायबरेली। जिला अस्पताल में डॉक्टरों और दवा कारोबारियों का गठजोड़ टूटने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना लाखों की कमाई के चक्कर में लखनऊ के दवा सप्लायरों ने ओपीडी को कब्जे में कर रखा है। डॉक्टरों के आवासों पर सेटिंग के बाद ओपीडी में लिखी जा रही दवाएं तय मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं, जहां मरीजों की जेब खाली की जा रही है।
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जिला अस्पताल में कुछ माह पहले दवा का खेल पकड़ा भी गया था। मामले में संबंधित डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किया गया था और बाहर की दवाएं न लिखने के संबंध में नोटिस भी चस्पा किए गए थे, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ी। मरीजों को खुलेआम बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि लखनऊ के करीब पांच दवा सप्लायरों की सेटिंग जिला अस्पताल की ओपीडी के डॉक्टरों से हैं। चिकित्सक उन्हीं सप्लायरों की मोनोपोली की दवाएं मरीजों को लिखकर मोटी रकम कमा रहे हैं। पिछले रविवार को अपर निदेशक ने भारी मात्रा में इंजेक्शन बरामद किए, लेकिन डॉक्टरों पर कोई असर नहीं पड़ा। डॉक्टरों व दवा कारोबारियों के गठजोड़ के आगे अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से नतमस्तक है। सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी के चिकित्सकों को मरीजों को अस्पताल की दवाएं देने के आदेश दिए गए हैं। बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टरों को चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी।
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ओपीडी में रही भीड़, इमरजेंसी में भी पहुंचे मरीज
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। सभी काउंटरों के साथ ही ओपीडी कक्षों के बाहर भी लंबी लाइन देखने को मिली। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दवा काउंटर पर भीड़ रही। परचा बनवाने के लिए मरीजों को पसीना बहाना पड़ा। ओपीडी में करीब 1800 मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए पहुंचे। इसमें जुकाम, बुखार, खासी के 500 से अधिक मरीज रहे। मेडिसिन और हृदय रोग विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ रही। उधर, इमरजेंसी में सांस और सीने में दर्द की समस्या के ज्यादा मरीज पहुंचे।
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