रायबरेली। लंपी की दस्तक से पहले पशुओं को पशुपालन विभाग सुरक्षा कवच मुहैया कराएगा। इसके लिए जल्द टीकाकरण अभियान शुरू होगा। शासन से 24 हजार वैक्सीन आई हैं। अफसरों का दावा है कि जिले में लंपी स्किन रोग का कोई मामला सामने नहीं आया है।
बारिश के दिनों में पशुओं में लंपी स्किन रोग का खतरा बढ़ा है। लंपी स्किन रोग मवेशियों में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसकी चपेट में आने पर पशुओं के शरीर पर गांठें और फोड़े जैसे घाव हो जाते हैं। बीमारी का असर पशुओं के स्वास्थ्य के साथ पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। विभाग ने बीमारी फैलने से पहले ही एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। शासन से आई वैक्सीन को जिले के 38 पशु चिकित्सालयों में उपलब्ध करा दी गई है।
मौजूदा समय में खुरपका, मुंहपका से पशुओं को बचाने के लिए विभाग की तरफ से टीकाकरण चल रहा है। पांच लाख 65 हजार के सापेक्ष अब तक करीब तीन लाख पशुओं को खुरपका, मुंहपका से बचाव के लिए टीके लगाए जा चुके हैं। इस अभियान के बाद पशुओं को लंपी स्किन रोग से बचाव के लिए टीके लगाए जाएंगे। डीह व नसीराबाद प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में कोई मामला सामने नहीं आया है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धनंजय सिंह ने बताया कि वैक्सीन उपलब्ध हो गई है। जल्द पशुओं में टीके लगाए जाएंगे। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशवंत सिंह ने बताया कि वैक्सीन चिकित्सालय में आ गई है। शीघ्र ही वैक्सीन की पहली डोज लगवाने का काम शुरू करा दिया जाएगा।
समय पर टीकाकरण जरूरी
रिटायर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि लंपी रोग से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण जरूरी है। पशुपालकों को भी पशुओं की निगरानी करनी चाहिए। यदि किसी गाय के शरीर पर फोड़े दिखाई दें, वह खाना-पीना बंद कर दे या उसकी तबीयत खराब हो, तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए। टीकाकरण के साथ पशुओं की सफाई और उनके रहने के स्थान की स्वच्छता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
इनसेट पशुओं को लंपी स्किन रोग से बचाव के लिए शासन से वैक्सीन आ गई है। वैक्सीन को सभी पशु चिकित्सालयों में पहुंचा दी गई है। खुरपका, मुंहपका टीकाकरण अभियान के बाद लंपी स्किन रोग से बचाव के लिए भी टीकाकरण शुरू कराया जाएगा। हालांकि जिले में लंपी स्किन रोग का कोई खतरा नहीं हैं।
डॉ. कुलदीप द्विवेदी, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी