प्रदेश सरकार की मंशा है कि परिषदीय स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तरह संचालित कराया जाए, लेकिन स्कूलों में संसाधनों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। निजी स्कूलों में बिजली के साथ ही फर्नीचर आदि की समुचित व्यवस्था है, लेकिन परिषदीय स्कूलों में कुछ नहीं है।
बिजली का कनेक्शन न होने के कारण करीब डेढ़ लाख बच्चे गर्मी से जूझेंगे। 2500 स्कूलों में 1196 स्कूलों में अब तक बिजली की व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। जिन स्कूलों में बिजली के कनेक्शन हैं, उन स्कूलों में वायरिंग नहीं है।
एक अप्रैल से नया शिक्षासत्र शुरू हो रहा है। इस बार शासन शिक्षा के स्तर के साथ ही अन्य सुविधाओं में सुधार के लिए भी प्रयास कर रहा है। शासन की मंशा पर स्कूलों के भवन तो बनवा दिए गए, लेकिन बिजली की व्यवस्था के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है।
पांच साल पहले स्कूलों में बिजली के कनेक्शन व वायरिंग आदि कार्यों के लिए शासन से बजट मिला था, लेकिन लूट-खसोट होने के कारण शासन की मंशा पूरी नहीं हो सकी। शहरी क्षेत्र के स्कूलों के अलावा अन्य स्कूलों में बिजली के कनेक्शन का तार तक गायब हो गये।
वायरिंग को लोग उखाड़ ले गए हैं। इसके अलावा 960 प्राथमिक व 236 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में अब तक बिजली के कनेक्शन व वायरिंग आदि कार्यों की व्यवस्था बजट न मिलने के कारण नहीं हो सकी है। इन स्कूलों में गर्मी के सीजन में बच्चों को पढ़ाई करने में समस्या का सामना करना पड़ता है।
गर्मी अधिक होने के बाद बच्चे घर चले जाते हैं। शासन से इन स्कूलों में बिजली की व्यवस्था के लिए बजट तक नसीब नहीं हुआ है। बीएसए रामसागर त्रिपाठी का कहना है कि बिजली की व्यवस्था के लिए बजट न मिलने के कारण कनेक्शन नहीं हो सके हैं। डीएम ने क्रिटिकल गैप मद से 155 पूर्व माध्यमिक स्कूलों के लिए धन दिलाया है। इन स्कूलों में बिजली की व्यवस्था कराई जा रही है।