बदलाव का दौर चाहे जितना हो गया हो, लेकिन अब भी लोग झाड़-फूंक के चक्कर में फंसे हैं। ये अंधविश्वास उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ऐसा ही एक मामले में झाड़फूंक के चक्कर में एक किशोर की जान चली गई। उसकी मौत के बाद श्मशान घाट पर आरोपी बाबा उसे जिंदा करने का तमाशा करता रहा।
यहां तक वह इलाज कराने की बात पर परिवारीजनों से मारपीट करने तक के लिए आमादा हो गया। सूचना पर पुलिस पहुंची और बाबा को पकड़कर कोतवाली ले आई। कार्रवाई करने के बजाय पुलिस मामले में सुलह-समझौता करा दिया। बाद में परिवारीजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। यह मामला क्षेत्र में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।
लालगंज कोतवाली क्षेत्र के डीपेमऊ मजरे सोहवल गांव निवासी अंकित कुमार (14) पुत्र राज बहादुर एक सप्ताह से बीमार चल रहा था। इलाज कराने के बाद भी अंकित की हालत में सुधार नहीं हो रहा था। इस पर पिता राज बहादुर अपने बेटे अंकित को लेकर लालगंज क्षेत्र के डकौली गांव में रहने वाले एक बाबा के पास गया था।
बाबा बाल्हेश्वर ने झाड़-फूंक के जरिए अंकित को ठीक करने की बात कही। साथ ही कहा कि अब अंकित को कोई अन्य दवा मत खिलाना। इस पर अंकित की हालत और बिगड़ गई। मंगलवार रात अंकित ने दम तोड़ दिया। बुधवार को परिवारीजन अंकित के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए डलमऊ स्थित श्मशान घाट पर पहुंचे।
अंकित की मौत की सूचना पर बाबा भी घाट पर पहुंच गया। उसने यह कहते हुए घाट पर ही तमाशा करने लगा कि वह अंकित को जिंदा कर देगा। होते-करते काफी समय तक बाबा यही तमाशा करता रहा। परिवारीजनों ने इसका विरोध किया तो बाबा ने उनसे मारपीट तक का प्रयास किया।
इसकी सूचना परिवारीजनों ने पुलिस को दे दी। सूचना पर पुलिस पहुंची और बाबा को पकड़कर कोतवाली ले आई। पिता समेत अन्य परिवारीजन भी कोतवाली पहुंचे। बावजूद पुलिस कार्रवाई करने के बजाय सुलह-समझौता करा दिया। कोतवाल विजय प्रताप यादव का कहना है कि परिवारीजनों ने मामले में सुलह-समझौता कर लिया। इस पर कार्रवाई नहीं की गई।
किशोर अंकित की मौत से श्मशान घाट पर जहां अपनों के आंसू नहीं थम रहे थे, वहीं बाबा के खिलाफ सभी में गुस्सा था। उनका कहना कि बाबा के बहकावे में न आते तो अंकित की जान न जाती। पिता राज बहादुर दहाड़े मारकर रो रहा था। वहीं मां सावित्री भी बेटे की मौत से गमगीन है। हर कोई बाबा को छोड़ने के लिए पुलिस को कोस रहा था।