बदले मौसम से बुखार, डायरिया के रोगियों की बढ़ती संख्या की वजह से जिला अस्पताल हाउसफुल हो गया है। रोगियों के भर्ती करने के लिए बेड नहीं है। अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में इलाज के लिए रोगियों और उनके तीमारदारों को मारामारी करनी पड़ रही है।
गंभीर रोगी को भर्ती कराने के लिए अलग से चारपाई लगाई जा रही है। हालात ये हैं कि डॉक्टर को दिखाने तक के लिए रोगियों को घंटों लाइन में लगकर धक्कामुक्की करनी पड़ रही है। लेकिन इस समस्या के निदान को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
जिला अस्पताल में 202 बेड की व्यवस्था है। इधर, मौसम में बदलाव के कारण बुखार, डायरिया के रोगियों की तादाद एकाएक बढ़ गई। इसका असर सुबह सिर्फ ओपीडी में नहीं पड़ा है, बल्कि गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती करने के लिए बेड तक खाली नहीं है।
कुछ वार्डों में इक्का-दुक्का चारपाई अलग से डालकर रोगियों का इलाज कराने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह व्यवस्था लोगों के लिए नाकाफी साबित हो रही है। सुबह से ही डॉक्टरों के कक्ष के सामने रोगियों की लाइनें लग जाती हैं। डॉक्टर को जल्दी से दिखाने के चक्कर में आपस में ही रोगियों में धक्कामुक्की होती है।
इमरजेंसी कक्ष से रोगी को भर्ती कर वार्डों में भेजा जाता है। इधर रोगी जिंदगी और मौत से जूझता रहता है, उधर रोगी को भर्ती करने वाली फाइल वार्डों में घूमा करती है। वजह जिस वार्ड फाइल जाती, वहीं पर स्टाफ नर्स का जवाब रहता है कि बेड नहीं है।
इसलिए रोगी को दूसरे वार्ड ले जाए। होते-करते काफी समय बीत जाता है, लेकिन यह तय नहीं हो पाता है कि गंभीर रोगी को किस वार्ड में भर्ती किया जाना है। अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में बेड भर जाने के कारण डॉक्टर और फार्मासिस्ट में मारामारी मची है।
रोगी को देखकर उसे भर्ती करने की फाइल तो तैयार कर ली जाती है, लेकिन यह सोचने में काफी समय लग जाता है कि आखिर रोगी को किस वार्ड भेजा जाए। ऐसे में गंभीर रोगियों को ही भर्ती किया जाता है। अन्य रोगियों को इलाज करके छुट्टी दे जाती है।
तेज बुखार से पीड़ित राही ब्लॉक क्षेत्र के मछेछर गांव के दिनेश को परिवारीजन अस्पताल लेकर आए। तीमारदारों ने भर्ती करने की बात कही तो बेड खाली न होने की बात कहकर इलाज करके छुट्टी दे दी गई। सतांव क्षेत्र के गुरुबख्शगंज चौराहा निवासी अनुज सिंह पेट दर्द से पीड़ित थे।
उन्हें भी इलाज करके छुट्टी दे दी गई। अमावां क्षेत्र के मैनूपुर गांव की पायल को भी बुखार था। बेड खाली न होेने पर परिवारीजन उसे लेकर नर्सिंग होम चले गए। यही हाल वहां आने वाले लगभग हर रोगी का है, जो बेड खाली न होने से जूझ रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1700 रोगी इलाज के लिए आ रहे हैं। सुबह से ही डॉक्टरों के कक्ष के सामने रोगियों की लाइनें लग जाती हैं। डॉक्टर को जल्दी से दिखाने के चक्कर में आपस में ही रोगियों में धक्कामुक्की होती है।
आलम ये है कि दोपहर दो बजे के बाद भी रोगियों की लाइनें लगी रहती हैं। अस्पताल में मौजूदा समय में 28 डॉक्टरों की तैनाती है। मौजूदा समय में सर्दी, जुकाम, बुखार, डायरिया और पेट दर्द के रोगियों की तादाद अधिक आ रही है। इसी वजह से भीड़भाड़ गई है।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के घुरवारा निवासी अभिषेक (12) को बुखार के साथ झटके आने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिता धर्मेंद्र ने बताया कि बेटे की हालत गंभीर थी। पहले बेड के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।
आधे घंटे बाद चारपाई की व्यवस्था करके इलाज किया गया। डीह ब्लॉक क्षेत्र के ठकुराइन का पुरवा गांव के रामस्वरूप को चोट लग गई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बेड खाली नहीं था। ऐसे में उसे दूसरी चारपाई की व्यवस्था करके भर्ती कराया गया।
‘अमर उजाला’ की टीम मंगलवार सुबह जिला अस्पताल पहुंची। रोगियों और तीमारदारों की समस्याओं की कवरेज की और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद अस्पताल के अफसरों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
दोपहर बाद जिस चारपाई पर रोगी भर्ती किए गए थे, उन्हें खाली कराकर उन्हें बेड मुहैया करा दिए गए। तीमारदारों ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में अभी भी बेड की कमी है। फिजीशियन डॉ. बीरबल का कहना है कि मौसम बदला है।
इस वजह से सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा पेट दर्द के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इस वजह से अस्पताल में बेड खाली नहीं है। जरूरी है कि लोग खानपान पर ध्यान दें। कटे-फटे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। धूप से बचे। ऐसे में बीमारी से बचा जा सकता है।
सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि रोगियों की बढ़ती तादाद के चलते जिला अस्पताल में बेड फुल हुए हैं। इसे देखते हुए अलग से चारपाई की व्यवस्था करके रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। समस्त डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि डॉक्टरों के इलाज में कोताही न बरती जाए। अस्पताल आने वाले हर रोगी का बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है।