जगतपुर के नवाबगंज के पास ब्रिटिश काल में बनी हाई पट्टी पर ग्रामीणों का किया गया अतिक्रमण।
रायबरेली। करीब 80 साल पुरानी इकछनिया हवाई पट्टी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से उपेक्षा झेल रही इस हवाई पट्टी को विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ मंडल के निर्देश पर हवाई पट्टी की जमीन का सर्वे और सीमांकन शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया आठ जुलाई तक पूरी की जानी है। इससे जिले के लोगों में हवाई सेवा शुरू होने की उम्मीद फिर जाग गई है।
रायबरेली शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर सदर तहसील के इकछनिया गांव में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942-43 में अंग्रेजों ने इस हवाई पट्टी का निर्माण कराया था। करीब 500 बीघे में फैली यह हवाई पट्टी कभी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ इसका अस्तित्व लगभग खत्म होने लगा। वर्तमान में यहां वीरानी पसरी है और आसपास के ग्रामीण जानवर चराने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। कई स्थानों पर जमीन पर कब्जे भी हो चुके हैं।
हवाई पट्टी के आसपास इकछिना, कंचौदा, सराय ममो शरीफ, नवाबगंज, ओनी कमान, सान्हू कुआं, भांव, जमालपुर नानकारी और ओनी कोपा जैसे गांव स्थित हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि हवाई पट्टी विकसित हो जाती है तो पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। रोजगार और आवागमन के बेहतर अवसर भी पैदा होंगे।
इससे पहले भी कई बार हवाई पट्टी के विकास की योजनाएं बनीं, लेकिन हर बार मामला कागजों तक ही सीमित रह गया। सर्वे और सीमांकन की कार्रवाई शुरू होने से लोगों को इस बार उम्मीद बंधी है कि परियोजना धरातल पर उतर सकती है। सर्वे कार्य में सदर और ऊंचाहार तहसील के राजस्व कर्मियों के साथ सेना और प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं। अलग-अलग गांवों के लिए सीमांकन की तिथियां तय की गई हैं। प्रशासन का कहना है कि सर्वे के दौरान लोगों की आपत्तियों और शिकायतों का भी निस्तारण कराया जा रहा है।
एसडीएम ऊंचाहार विवेक राजपूत ने बताया कि निर्धारित समय के भीतर सर्वे और सीमांकन का कार्य पूरा कराया जाएगा। स्थानीय निवासी बीपी सिंह का कहना है कि हवाई पट्टी विकसित होने से रायबरेली के लोगों का हवाई यात्रा का सपना भी पूरा हो सकेगा।