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न जांच न इलाज, खतरे में चार हजार आबादी की सांसें

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गदागंज (रायबरेली)। दीनशाहगौरा ब्लॉक क्षेत्र की चरुहार बीक ग्राम पंचायत की चार हजार आबादी दहशत में है। यहां एक पखवारे में छह लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से किसी को बुखार तो किसी को सांस लेने में दिक्क्त थी।
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इसके बाद भी न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और न ही लोगों की जांच के साथ इलाज हो सका है। कोरोना कहर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे यहां पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं।
सुविधाएं नदारद हैं और लोगों को जांच और इलाज की दरकार है। ‘अमर उजाला’ टीम ने गुरुवार को ग्राम पंचायत चरुहार बींक और उनके पुरवे गोड़ा, सेंदुरीहार, बहादुरगंज, पूरे धाना, मुन्ना सिंह का पुरवा में पहुंचकर हकीकत जानी तो पता चला कि कोरोना में भी इलाज मिलना संभव नहीं है।
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उनकी व्यथा सुनने के लिए न तो स्वास्थ्य विभाग के अफसर हैं और न ही चुनाव के दौरान वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि। साफ-सफाई कराने की कौन कहे, गांवों का सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया। कोरोना से लोगों को बचाने के लिए आया धन कागजों पर खर्च किया जा रहा है। यह ग्राम पंचायत गंगा कटरी क्षेत्र में आता है।
पहले अपनों को खोया, अब इलाज की बेबसी
गोड़ा गांव निवासी एवं रिटायर्ड शिक्षक रामदेव तिवारी की मौत होने पर पूरा परिवार गमगीन है। बेटे बुचून तिवारी कहते हैं कि पिता को बुखार आ रहा था, 15 दिन तक इलाज चला। जिला अस्पताल इलाज कराने के लिए लेकर गए और वापस घर ले आए, लेकिन उनकी मौत हो गई।
अब हम अपने और परिवार के सदस्यों की जांच का इंतजार कर रहे हैं। गोमती देवी भी जिंदगी की जंग हार गई। उनके पति राममोहन शुक्ला कहते हैं कि उनकी पत्नी को सांस फूलने की दिक्कत थी।
इलाज के लिए बेलाभेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे, लेकिन घर पर उनकी मौत हो गई। मक्कू कहते हैं कि उनकी पत्नी रामरती को बुखार आ रहा था। इलाज कराया, लेकिन जान नहीं बची।
अनिल कहते हैं कि उनकी मां कुंवारा की जान चली गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर के सदस्यों की जांच करने नहीं आई। राम बहादुर कहते हैं कि पत्नी राजकुमारी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। समय से सही इलाज नहीं मिल पाया, जिससे उनकी मौत हो गई। राजकुमारी के सदमे में आकर पिता लाला यादव भी जान गंवा बैठे। मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग टीम गांव नहीं पहुंची।
अस्पताल जाओ तो सही इलाज नहीं करते
चरुहार बींक ग्राम पंचायत के अमित मिश्रा, यादवेंद्र यादव, सतीश कुमार, दीपू यादव, मोहित त्रिवेदी, जगतपाल यादव, मनोज तिवारी, अमरनाथ मिश्रा कहते हैं कि सीएचसी दीनशाहगौरा के अफसर गांव के लोगों के इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं। मौतों के बाद कोई टीम जांच करने तक नहीं आई।
अस्पताल मरीज लेकर जाओ तो इलाज करने के बजाय जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। समय से अस्पताल में डॉक्टर तक नहीं मिलते। गांव में दहशत और गम का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं।
कोरोना को देखते हुए सभी सीएचसी अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। साफ निर्देश दिए हैं कि यदि कहीं पर मौतें हो रही हैं तो स्वास्थ्य टीम गांव भेजकर मृतक के परिवारीजनों सदस्यों और अन्य ग्रामीणों की जांच करके इलाज कराया जाए। चरुहार बींक ग्राम पंचायत में एक पखवारे में छह लोगों की मौत के बाद यदि स्वास्थ्य टीम गांव जांच करने नहीं पहुंची तो इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य टीम गांव भेजकर लोगों की जांच कराकर इलाज कराया जाएगा।
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डॉ.बीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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