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फर्जी अभिलेख लगा कर बेसिक में 34 साल नौकरी की, अब बर्खास्त

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रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। करीब 34 साल पहले सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हुआ एक शिक्षक प्रधानाध्यापक भी बन गया, लेकिन दो साल पहले हुई एक शिकायत में कराई गई जांच ने उसके सारे कारनामों को उजागर कर दिया। करीब 34 साल सेवाएं देने के बाद अब इस हेडमास्टर को फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने के मामले में सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही अब तक प्राप्त वेतन को राजकीय कोष में जमा कराने के आदेश भी दिए गए हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग में तेजबहादुर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने रायबरेली जिले के मैदेमऊ पोस्ट बेहटा कला का निवासी बताते हुए 14 अप्रैल 1985 में नियुक्ति पाई थी। उसे प्राइमरी पाठशाला बोझी भूलामऊ विकास क्षेत्र बहादुरपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती मिली थी। यह स्कूल पहले रायबरेली जिले में था, लेकिन अब अमेठी जिले में है।
वर्तमान में तेज बहादुर इसी जिले के सरेनी विकास क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर में बतौर हेडमास्टर तैनात था। शहर के रतापुर बाबा की कुटी निवासी अजय पाल सिंह नाम के व्यक्ति ने 14 सितंबर 2017 को शिकायती पत्र और 16 नवंबर 2018 को शपथ पत्र देकर बताया कि तेजबहादुर मूलत: उन्नाव जिले की बीघापुर तहसील क्षेत्र के निहालखेड़ा मजरे धनकोली का रहने वाला है। उसने रायबरेली जिले के मैदेमऊ गांव का फर्जी निवास लगाकर गलत तरीके से नौकरी हासिल की है।
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मामले में डीएम से भी शिकायत हुई। डीएम ने एसडीएम लालगंज से जांच कराई, जिसमें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका। इसके बाद उन्नाव जिले के स्वामी ईश्वरानंद इंटर कॉलेज बाबूखेड़ा से तेजबहादुर की कक्षा 10 की टीसी का सत्यापन कराया गया तो डीआईओएस ने धनकोली का पता होना सत्यापित किया।
एसडीएम बीघापुर ने भी अपनी जांच में माना कि तेजबहादुर धनकोली का रहने वाला है। इसी बीच 7 मार्च 2019 को तेजबहादुर को उच्च प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर के हेडमास्टर पद से निलंबित किया गया। बीईओ के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा गया। जवाब न मिलने पर रिमांडर भेजे गए। अंतिम चेतावनी के बाद तेज बहादुर ने जवाब दिया कि वह एक फर्जी मामले में लखनऊ कारागार में निरुद्ध है।
उसने अपनी सफाई में शिकायकर्ता अजयपाल के खिलाफ भी कुछ साक्ष्य दिए, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने तेजबहादुर के स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। प्रकरण में बीएसए पीएन सिंह ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से मार्गदर्शन मांगा, जिस पर 29 नवंबर 2019 को सचिव ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।
इस पर बीएसए ने सोमवार को तेज बहादुर को तत्काल प्रभाव से पदच्युत करने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने यह भी कहा है कि पदच्युत किए गए शिक्षक से अब तक प्राप्त वेतन राजकीय कोष में जमा कराया जाए। इस मामले में बीएसए ने वित्त एवं लेखाधिकारी को वेतन वसूली कराने और खंड शिक्षा अधिकारी सरेनी को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं। कार्रवाई सहित पूरे मामले से बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
वर्ष 1985 में एक शिक्षक के खिलाफ आई शिकायत में जांच कराई गई। हर स्तर पर पड़ताल कराने के बाद बेसिक शिक्षा सचिव से मार्गदर्शन मांगा। उन्होंने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए, जिस पर फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी पाने के आरोप में तेज बहादुर सिंह को बर्खास्त किया गया। साथ ही अब तक प्राप्त वेतन राजकीय कोष में जमा कराने के भी आदेश दिए गए।-पीएन सिंह, बीएसए।
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