शिवगढ़। देहली गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन शनिवार को कथाव्यास पूर्णिमा मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। भावपूर्ण कथा को सुनकर पूरा पंडाल नंद के घर आनंद भयो और जय कन्हैया लाल के जयघोष से गूंज उठा। प्रवाचक ने बताया कि धर्म की रक्षा करने व अधर्म का नाश करने के लिए भगवान धरती पर अवतार लेते हैं।
उन्होंने बताया कि अत्याचारी कंस के पापों से पीड़ित पृथ्वी माता जब देवताओं के साथ भगवान विष्णु के समक्ष पहुंचीं, तब प्रभु ने धर्म की रक्षा और दुष्टों के संहार के लिए पृथ्वी पर अवतार लेने का भरोसा दिया था। इसी संकल्प के तहत माता देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण का दिव्य प्राकट्य हुआ। उनके जन्म लेते ही देवकी-वासुदेव की बेड़ियां टूट गईं, पहरेदार सो गए और कारागार के द्वार भी स्वयं खुल गए।
इस अलौकिक घटना का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने बताया कि वासुदेव ने बालक कृष्ण को एक टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाया। वहां नंद और यशोदा ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद भगवान की लीलाओं का आरंभ हुआ। कथा पंडाल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान एक विशेष झांकी भी सजाई गई। बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस मौके पर पंकज भदौरिया, सुरेश तिवारी, आनंद शुक्ला, विवेकानंद चौरसिया, लवकुश शुक्ला मौजूद रहे।