रायबरेली। सर्वोदय नगर में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा में शुक्रवार को प्रवाचक कृष्ण कुमार शास्त्री ने अहिल्या उद्धार, धनुष भंग और भगवान परशुराम संवाद की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं, तो केवल अधर्म का नाश करने नहीं, बल्कि आत्माओं के उद्धार के लिए आते हैं। अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा, अहिल्या पत्थर नहीं थीं, वे अहंकार और अविश्वास की प्रतीक थीं।
उन्होंने बताया कि वन में विश्वामित्र के साथ जा रहे श्री राम को जब एक बड़ी शिला दिखी तो उन्होंने इसके बारे में गुरु ऋषि से पूछा। उन्होंने बताया कि यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या हैं, जो पत्थर हो गई हैं। अगर आपकी चरण रज का स्पर्श हो जाए, तो अहिल्या का उद्धार हो जाएगा। भगवान के चरण लगते ही अहिल्या प्रकट हो गईं और भगवान की प्रार्थना की। इससे उन्हें परमधाम की प्राप्त हुईं।
इसके बाद विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी पहुंचे। शिव धनुष भंग होने के बाद परशुराम पहुंचे। परशुराम और लक्ष्मण का संवाद की कथा सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। भागवत व्यास गोविंद त्रिपाठी ने कथावाचक का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक संजयानंद महाराज ने कहा कि विश्व सनातन सेना सनातन की अलख जगाने के कार्य के लिए इसका आयोजन कर रही है। इस मौके पर अलका द्विवेदी, मनोज पांडेय, अलका उपाध्याय, निर्मला उपाध्याय, मोहिता उपाध्याय, विकास सिंह मौजूद रहे।