सरेनी (रायबरेली)। बांदा-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर गेंगासों गंगा तट पर बने 40 साल पुराने पुल में दरार आ गई है। इस पुल से प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा छोटे और भारी वाहनों का आवागमन रहता है।
अधिकारियों ने पुल की तत्काल मरम्मत शुरू कराने के बजाय दरार वाली जगह पर बोरियां और बैरीकेडिंग कर खानापूर्ति कर दी। आवागमन न रोकने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एनएचएआई की ओर से इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर न तो आवागमन बंद किया गया है न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। इससे लोगों में नाराजगी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग से लखनऊ, फतेहपुर, लालगंज, टांडा, बांदा, कानपुर समेत अन्य कई जिले के वाहनों का आना-जाना होता है। 40 साल पुराना पुल काफी जर्जर हो गया है।
इस वजह से पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट के पास दरार आ गई है। सीमेंट-गिट्टी का मसाला उखड़ जाने की वजह से लोहे की सरिया दिखने लगीं हैं। इसकी जानकारी होने पर हड़कंप मच गया। सूचना विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई।
हरकत में आए अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त वाले स्थान पर मिट्टी भरी बोरियां और बैरीकेडिंग कराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग को पुल जोड़ता है।
इस वजह से पुल से मौरंग, गिट्टी लदे ट्रक निकलते हैं। इसके बावजूद एनएचएआई के अफसर पुल को दुरुस्त कराने में तेजी नहीं दिखा रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी है।
किनारे का हिस्सा धंसा, अंजान अधिकारी
गेंगासों गंगा नदी पर बने पुल के किनारे का हिस्सा काफी दिनों से धंसा है। एनएचएआई के अधिकारियों को यह नहीं दिखाई पड़ रहा है। जब बीच में दरार आई तो इस धंसे वाले हिस्से के किनारे मिट्टी की बोरियां रखवा दी गईं।
गेंगासों निवासी माताप्रसाद, बबलू सिंह, भोजपुर निवासी अश्वनी कुमार, अनुज कुमार ने बताया कि पुल के किनारे का हिस्सा काफी दिनों से धंसा हुआ है।
कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। उधर, गेंगासों चौकी इंचार्ज अजीत सिंह ने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। कोई हादसा न हो, इसके लिए सतर्कता बरती जा रही है।
लोक निर्माण विभाग खंड द्वितीय के एक्सईएन प्रमोद कुमार राणा ने बताया कि पुल और सड़क एनएचएआई की है। पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी हुई है। इसकी सूचना एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक समर बहादुर सिंह को दी गई है। जल्द ही पुल को ठीक कराने की बात कही गई है। उधर, इस संबंध में परियोजना से बात करने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।