रायबरेली। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) से परीक्षा के बाद शुक्रवार को बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के सिविल लाइन स्थित हेड ऑफिस में पकड़े गए बिजनौर के जालसाज को जेल भेज दिया गया है। पकड़े गए युवक को बैंक का अफसर बनवाने के लिए बिजनौर के ही सरगना से 10 लाख रुपये में डील हुई थी।
छह लाख रुपये एडवांस में लेकर परीक्षा पास कराई थी। चूंकि कई जालसाज पकड़ में आ गए, इसी कारण बायोमीट्रिक जांच के लिए युवक ने अपने अंगूठे पर रबड़ का अंगूठा लगाया था। पुलिस क्लू मिलने के बाद गैंग से जुड़े अन्य शातिरों को ढूंढने में जुट गई है।
बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के 300 पदों को भरने के लिए आईबीपीएस से 800 अभ्यर्थी मिलने के बाद बायोमीट्रिक व अन्य जांच के साथ ही ज्वॉइनिंग की प्रक्रिया चल रही है। शहर के हेड आफिस में बायोमीट्रिक व शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान शुक्रवार को सतर्कता टीम ने बिजनौर जिले के मिल्कबुआपुर नाथू पोस्ट मनकुआं धामपुर निवासी मृदुल कुमार कौशल को पकड़ लिया था।
इससे पहले बिहार प्रांत के ग्राम कुबड़ा पोस्ट परिऔना, नूरसराय नालंदा निवासी कन्हैयालाल और बिहार के ही गोविंदपुर, बाईपास रोड पटना निवासी राजीव रंजन व राज नगर गाजियाबाद निवासी मनीष कुमार पुत्र अनिल कुमार को भी पकड़कर जेल भेजा जा चुका है।
सिविल लाइन चौकी इंचार्ज एमपी सिंह ने बताया कि पकड़े गए मृदुल ने स्वीकार किया है कि उसने बिजनौर जिले के ही तरुण चौहान को बैंक में नौकरी दिलाने के लिए छह लाख रुपये दिए थे। शेष धनराशि नौकरी मिलने के बाद देने की बात हुई थी। सॉल्वर व अन्य दो के पूर्व में पकड़े जाने के कारण नकली अंगूठे के सहारे वह बायोमीट्रिक जांच प्रक्रिया पूरी कराने के प्रयास में था। उन्होंने बताया कि आरोपी मृदुल को जेल भेज दिया गया है। साथ ही तरुण चौहान को जल्द ही पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
रायबरेली। बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में सॉल्वर समेत चार जालसाजों के पकड़े जाने के बाद इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) की भर्ती प्रक्रिया पर पूरी तरह से प्रश्नचिह्न लग गया है। एक-एक करके कइयों के पकड़े जाने के बाद कोतवाली पुलिस भर्ती प्रक्रिया की भी जांच अंदर ही अंदर करवा रही है। पकड़े गए जालसाजों से पूछताछ में मिले क्लू के माध्यम से सर्विलांस व स्वॉट टीमें भी गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
बीयूपीजीबी की सतर्कता टीम ने अभ्यर्थियों व सॉल्वरों की फोटो मीक्सिंग को जांच के दौरान पकड़ा है। बायोमीट्रिक जांच में भी सच्चाई सामने आई। हैरत की बात है कि इतने बड़े स्तर पर परीक्षा कराने वाली आईबीपीएस ऐसे जालसाजों को नहीं पकड़ सकी। हिरासत में लिए गए सॉल्वर व युवकों से पूछताछ में गैंग के आईबीपीएस से जुड़े होने की बात सामने आ रही है।
सिविल लाइन के चौकी इंचार्ज एमपी सिंह ने बताया कि आरोपियों को जेल भेजा गया है। मामले की जांच भी कराई जा रही है। जल्द ही गैंग को पकड़ा जाएगा।