रायबरेली। डीपीआरओ उपेंद्र राज सिंह ने मंगलवार को बछरावां ब्लॉक के शेषपुर समोधा गांव में छापा मारा। यहां डीएम व अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों से बिना स्वीकृति लिए ही करीब 34 लाख रुपये के कार्य शासनादेश के विपरीत करा दिए गए।
इसके अलावा कुछ कार्यों को तोड़कर कराया गया है। प्रथम दृष्टया गड़बड़झाला पकड़ में आने के बाद डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित कर दिया है और ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कड़ी कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है।
महराजगंज में संपूर्ण समाधान दिवस में शामिल होने के बाद डीपीआरओ ने बछरावां ब्लॉक के शेषपुर समोधा गांव में राज्यवित्त एवं 14वें वित्त से कराए गए विकास कार्यों की जांच करने के लिए पहुंच गए।
निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ ने पाया कि चंदू के घर से पुट्टू मिश्रा के घर तक 7.48 लाख रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग का कार्य कराया है। पांच लाख से अधिक की लागत का कार्य होने के कारण वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति डीएम से लेनी चाहिए थी, लेकिन डीएम ने स्वीकृति नहीं ली गई।
इसके अलावा जूनियर स्कूल में 4.53 लाख व 4.48 लाख की सड़क के कार्य की स्वीकृति डीपीआरओ से लेनी चाहिए, लेकिन स्वीकृति नहीं ली गई। इसी तरह अन्य कार्यों की भी बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति लिए काम करवा दिए गए। कई कार्यों को तोड़कर कराया गया है।
जांच में शासनादेश का उल्लंघन करके करीब 34 लाख के कार्यों में मनमानी पकड़ में आने के बाद डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी अमरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने शेषपुर समोधा की प्रधान गीता सिंह के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कार्रवाई के बाद मनमानी करने वालों में हड़कंप मच गया है।
शासनादेश है कि राज्यवित्त व 14वें वित्त से काम कराने के लिए पांच लाख रुपये तक डीपीआरओ और पांच लाख से अधिक की लागत के कार्यों की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति लेना अनिवार्य है। शेषपुर समोधा में 34 लाख के कार्य कराए गए, लेकिन शासनादेश का उल्लंघन करने के कारण सचिव को निलंबित किया गया है। प्रधान के अधिकार सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उपेंद्रराज सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी