पुलिस लाइंस मैदान में शुक्रवार को जनपदीय बेसिक क्रीड़ा प्रतियोगिता में विभागीय लापरवाही का खामियाजा खिलाड़ियाें को भुगतना पड़ा। अलग-अलग दौड़ में शामिल चार बालिकाएं भूख-प्यास से बेहाल होकर ट्रैक पर लड़खड़ाकर गिर पड़ीं। इससे हड़कंप मच गया। मौके पर चिकित्सीय टीम नहीं होने के कारण शिक्षकों के होश उड़ गए। आननफानन में उन्हें ट्रैक से बाहर लाकर प्राथमिक उपचार किया गया।
जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की खेलकूद प्रतियोगिता में अनियमितता खुलकर सामने आ गई। गुरुवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को बीएसए मैदान में पहुंचे जरूर, लेकिन खामियों से मुंह चुराते नजर आए।
बीएसए के सामने ही जूनियर स्तर बालिका दौड़ के दौरान दो बालिकाएं बेहोश होकर गिर गई। इसमें अटौरा बुजुर्ग की सोनी और बेलीगंज विद्यालय की रिंकी है। परिसर में चिकित्सा विभाग की ओर से कोई टीम नहीं होने के कारण शिक्षकों में हड़कंप मच गया।
दोनो खिलाड़ियाें के चेहरे पर पानी डालकर किसी तरह होश में लाया गया। वहीं दो अन्य बालिकाएं भी दौड़ में बेहोश हो गईं। विभाग की ओर से इस दौरान शिक्षकों को लंच पैकेट तो दिया गया, लेकिन खिलाड़ियों को भूखे ही लौटना पड़ा।
इंटर के छात्र ने जूनियर में लगाई दौड़
प्रतियोगिता में कई खिलाड़ी ऐसे भी शामिल हुए, जो निजी कॉलेज के पढ़ने वाले थे। इसका खुलासा तब हुआ, जब दौड़ में प्रथम आए एक खिलाड़ी से विद्यालय का नाम पूछा गया, तो वह सही जवाब नहीं दे सका। 50 मीटर दौड़ जूनियर बालक वर्ग में प्रथम आए अंकुर से मौके पर मौजूद निर्णायकों ने विद्यालय का नाम पूछा तो सही जवाब नहीं दे सका। कड़ाई से पूछने पर पता चला कि वह एक निजी विद्यालय में इंटर का छात्र है। बाद में उसे अपात्र कर दिया गया। विभाग की ओर से जारी निर्देशों में फर्जी खिलाड़ियों को रोकने को कहा गया। वहीं यह पूरी तरह से तार-तार होता रहा।
बीएसए पर धन के बंदरबांट का आरोप
बीएसए की ओर से खिलाड़ियों को लंच पैकेट व्यवस्था नहीं कराए जाने से शिक्षक भी खफा रहे। शिक्षक बृजेंद्र सिंह राठौर, बृजेंद्र शरण श्रीवास्तव ने बीएसए पर धन के बंदरबांट का आरोप लगाया। कहा कि दिनभर बच्चे भूखे-प्यासे भटकते रहे। विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं कराई गई। इससे अधिक शर्म की बात और क्या हो सकती है। उधर, जिला व्यायाम शिक्षिका रेनू शुक्ला का कहना है कि विभाग की ओर से निर्णायकों और सहयोगियों के लिए ही लंच की व्यवस्था की गई थी, जो सुचारु रूप से वितरित किया गया। बच्चों के लिए लंच पैकेट की व्यवस्था नहीं थी।
विभाग की ओर से मिला बजट काफी कम है। इसी में पूरी व्यवस्था करानी होती है। रात्रि विश्राम के दौरान खिलाड़ियाें को भोजन देना होता है। विभाग की ओर से लंच देने का प्राविधान नहीं है। दौड़ में खिलाड़ियों के बेहोश होने की वजह नहीं मालूम है। -जीएस निरंजन, बीएसए