रायबरेली। जिले में एक ओर जहां सर्पदंश की घटनाएं थम नहीं रही हैं, वहीं लोग लापरवाही करने से भी बाज नहीं आ रहे। सर्पदंश के बाद 10 साल के बच्चे को करीब छह घंटे बाद जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने व झाड़फूंक के चलते बच्चे की मौत हो गई। मंगलवार को सर्पदंश के चार और मरीजों को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया है।
हरचंदपुर क्षेत्र के करौंदी निवासी नीरज (10) सुबह करीब आठ बजे सर्पदंश का शिकार हो गया। उसे नौ बजे आस्तीक मंदिर ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे पूर्वाह्न 11.30 बजे हरचंदपुर सीएचसी पहुंचाया गया। इसके बाद भी सुधार न आने पर उसे 1.45 बजे जिला अस्पताल लाया गया। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मंगलवार को मझिगवां निवासी श्रीराम (60), गोपाया डीह निवासी कंचन (22), कुंहारन का पुरवा डीह निवासी हरिकेश (24) और बेवल नसीराबाद निवासी गुड्डन (35) को भी सर्पदंश के बाद जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि सर्पदंश के बाद मरीज को तुरंत अस्पताल लाकर इलाज शुरू कराएं। समय से इलाज शुरू होने से मरीज को आसानी से बचाया जा सकता है।
आठ बच्चों समेत बुखार के 21 मरीज भर्ती
जिले में बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को आठ बच्चों समेत 21 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। बुखार के चपेट में आए प्रभात (3), अयांशी (1), दिव्यांशी (1), आरोह (4), असद (4), श्यामजी (8), राधा (17), प्रियंका (16), महला (24), विकास (22), सुशीला (50), फूलकली (70), रमेश (19) आदि मरीजों को भर्ती कराया गया है।