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जेल की सुरक्षा में खलल डाली तो तन्हाई में काटनी पडेंग़ी रातें

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रायबरेली। शातिर बंदियों और कैदियों को अब जेल की सुरक्षा में खलल डालना आसान नहीं होगा। यदि वह ऐसा करते हैं तो उन्हें तन्हाई में रहकर रातें काटनी पड़ेंगी, जहां पर सिर्फ उन्हें अकेला रखा जाएगा। जिला कारागार में चार सालिट्री सेल (एकांत बैरक) बनकर तैयार हो गई हैं। अरसे से सुरक्षा की दृष्टि से एकांत बैरक बनवाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से मांग की जा रही थी। मांग पूरी हुई और अब यह बैरकें बनकर तैयार हो गईं। बस जिस कार्यदायी संस्था ने इन चार सालिट्री सेल को तैयार किया है, उसे जेल प्रशासन को इन्हें हैंडओवर करना बाकी है। पिछले वर्ष में जेल की बाउंड्रीवाल फांदकर दो बंदियों को भाग जाने की घटना के बाद जेल प्रशासन की तरफ से बाउंड्रीवाल की सुरक्षा में सिपाहियों की एक-एक घंटे ड्यूटी लगा दी गई है। इसके अलावा चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए गए हैं। इस समय जेल की सुरक्षा में 40 सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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बाउंड्रीवाल पर लगेंगी सर्च लाइट
पिछले साल जेल की बाउंड्रीवाल फांदकर दो बंदियों को भाग जाने की घटना के बाद जिला कारागार की सुरक्षा किस तरह बेहतर की जा रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाउंड्र्ीवाल पर लाइटिंग बढ़ाने के लिए सर्च लाइट लगवाने का खाका तैयार किया गया है। जेल अफसरों ने बाउंड्रीवाल पर सर्च लाइटों की मांग उच्चाधिकारियों से की है। अफसर कहते हैं कि सर्च लाइटें लगने से और उजाला होगा, जिससे बंदियों-कैदियों को जेल की सुरक्षा तोड़ना आसान नहीं होगा। जेल की सुरक्षा के लिए वाच टावर लगाने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों के पास भेजा गया है।
आंकड़ों पर एक नजर
कुल बंदी-कैदी 1316
सिद्धदोष पुरुष 92
विचाराधीन पुरुष 1138
एनएसए 3
अल्प वयस्क 46
महिला सिद्धदोष 2
महिला विचाराधीन 38
बच्चे 2
इनसेट
क्षमता से दोगुना ज्यादा बंदी
जेल की सुरक्षा करना आसान नहीं है। इसकी वजह है कि जेल में मौजूदा समय में क्षमता से दोगुना ज्यादा बंदी है। जेल की क्षमता 486 बंदियों की है, जबकि इस समय जेल के अंदर बंदियों-कैदियों की 1316 क्षमता है। जेल की सुरक्षा के लिए जेल अधीक्षक, जेलर समेत 122 लोगों के स्टाफ की जरूरत है, लेकिन मौजूदा समय में 75 का स्टाफ ही तैनात है। रायबरेली के अलावा लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ के अलावा कई प्रांतों के शातिर अपराधी इस समय जेल में बंद चल रहे हैं। गाहे-बगाहे यह शातिर अपराधी स्टाफ के लिए चुनौती भी बनते हैं। इसी देखते हुए जेल की सुरक्षा का ताना बना नए सिरे से बुना जा रहा है। संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं। स्टाफ की कमी दूर करने के लिए लिखापढ़ी की गई है।
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जेल में बंद शातिर बंदियों और कैदियों को रखने के लिए यहां पर चार सालिट्र्ी सेल (एकांत बैरक) बनकर तैयार हो गई हैं। अगले माह से कार्यदायी संस्था की ओर इन बैरकों को हैंडओवर कर लिया जाएगा। पिछले साल बंदियों के भाग जाने के बाद बाउंड्रीवाल की सुरक्षा पर फोकस किया गया है। पूरी जेल में 30 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। इसमें से चार सीसीटीवी कैमरे बाउंड्रीवाल पर लगवाए गए हैं। सर्च लाइटों की मांग की गई है। क्षमता से अधिक बंदी यहां पर हैं। ऐसे में जेल की सुरक्षा को लेकर हर पल चौकन्ना रहा जाता है। -सत्य प्रकाश, जेल अधीक्षक
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