बछरावां। पड़ीराकला गांव स्थित सरकारी गोशाला में संरक्षित गोवंशों की मौत के मामले की जांच शुरू हो गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में पाया गया है कि जिम्मेदारों की लापरवाही से गोवंशों की मौत हुई है। देखभाल के नाम पर खानापूरी होती थी। गोवंशों को भरपेट चारा नहीं मिल पाता था।
यह हाल तब था, जब प्रतिदिन एक गोवंश पर 50 रुपये खर्च करने के लिए बजट दिया जाता था। ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) की तहरीर पर पांच केयरटेकरों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर शुक्रवार को उन्हें जेल भेज दिया गया। पड़ारीकला गांव स्थित सरकारी गोशाला में करीब 30 गोवंशों की मौत हो गई थी। उनके अवशेष बृहस्पतिवार को नाले में पाए जाने पर हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने पहुंचकर हंगामा किया था।
महराजगंज तहसील प्रशासन का दावा था कि करीब 12 गोवंशों की मौत हुई है। मौके पर दो गोवंश मरे मिले थे, जबकि अन्य गोवंशों के अवशेष पाए गए थे। यह गोशाला करीब 20 लाख रुपये से बनकर तैयार हुई थी, जिसका संचालन एक अक्तूबर 2024 में शुरू हुआ था। बीते एक नवंबर को गोशाला में 195 गोवंशों को संरक्षित होने का दावा किया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि ऑनलाइन पोर्टल पर गोवंशों के बारे में गलत सूचना दर्ज कराई जाती है। बीडीओ शिवबहादुर सिंह का दावा है कि समय-समय पर गोशाला का निरीक्षण किया जाता है। यह सब कैसे हो गया, इसकी जांच कराई जाएगी। गोरक्षा संगठन के कार्यकर्ता मानस त्रिवेदी ने कहा कि गोवंशों की तस्करी पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। प्रधान व बीडीओ पर कार्रवाई हो।
सीओ महराजगंज प्रदीप कुमार ने बताया कि बछरावां ब्लॉक के वीडीओ ओम प्रकाश की तहरीर पर गोवंशों की देखभाल करने वाले केयरटेकरों अमित, संतोष, लक्ष्मी, संतराम, राममिलन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों को जेल भेजा गया है। देखभाल में बरती गई लापरवाही के कारण ही गोवंशों की मौत की बात सामने आई है।
प्रधान, वीडीओ पर भी हो कार्रवाई, खाल तस्करी रोकी जाए
ग्रामीण रामभारत, अंकित, गुड्डू, रामचरन का कहना है कि ग्राम प्रधान और वीडीओ के खिलाफ भी एफआईआर होनी चाहिए। प्रधान और वीडीओ के पास भी संरक्षित गोवंशों की देखभाल की जिम्मेदारी होती है। गोवंशों को संरक्षित करने के नाम पर मिलने वाली धनराशि पर कमीशनबाजी होती थी। इसीलिए गोवंशों को भरपेट भोजन नहीं मिल पाता था। गोवंशों की खाल तस्करी भी कराई जा रही थी। सुनील कुमार और ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो धरना प्रदर्शन होगा।
ग्राम प्रधान अजय कुमार ने बताया कि मृत गोवंशों को दफना दिया गया था। मिट्टी बहने के कारण अवशेष बाहर निकल आए थे। गोवंशों की देखभाल में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाती है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेशचंद्र ने बताया कि प्रति हफ्ते वह गोशाला का निरीक्षण कर बीमार गोवंशों का इलाज करते हैं। बृहस्पतिवार को वह छुट्टी पर थे। घटना कैसे हुई है, इसकी जांच करेंगे।