महराजगंज (रायबरेली)। तहसील मुख्यालय सहित गांवों में यूरिया खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। समितियों पर ताले लटक रहे हैं। अगर खुल भी रही हैं तो खाद नहीं है। अपनी फसल को लेकर किसान चिंता में डूबे हुए हैं। उनका कहना है कि समय पर अगर खेतों में खाद न पड़ी तो पैदावार कम होगी या फिर कमजोर हो जाएगी। पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की फसल बर्बाद हो गई तो वे दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे।
महराजगंज कस्बा समेत हलोर, जमुरावा, मऊ, अलीपुर, बसकटा, ओसाह, सागरपुर, गढ़ी व पोखरनी समेत अन्य गांवों के किसानों को यूरिया खाद पाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है, फिर भी उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। अफसरों को यह समस्या दिखाई नहीं दे रही है और न ही किसानों की बात सुनी जा रही है। इससे क्षेत्र के किसानों के अंदर आक्रोश पनप रहा है।
क्षेत्रीय किसान शैलेंद्र साहू, रमाकांत अवस्थी, शिव बहादुर पांडेय व राम किशोर शुक्ला आदि ने बताया कि इन दिनों खेतों की सिंचाई का दौर चल रहा है। इसी समय यूरिया खाद की जरूरत होती है लेकिन समितियों पर ताले लटक रहे हैं। समितियों पर एक ही जवाब मिलता है कि जब खाद आएगी तभी मिलेगी। किसानों का कहना है कि संकट बताकर बाजार में खाद की कालाबाजारी की जा रही है।