रायबरेली। कुंवर मऊ गांव में वर्षों पुराने जमीन विवाद ने बृहस्पतिवार रात हिंसक रूप ले लिया। ससुर तेज बहादुर सिंह ने अपने परिजनों के साथ मिलकर दामाद वीरेंद्र कुमार सिंह पर चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। वीरेंद्र के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने हत्या में आरोपित सास रीता और मौसी मीरा को गिरफ्तार कर हंगामा शांत कराया गया। मुख्य आरोपी तेज बहादुर सिंह अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वीरेंद्र (35) का तेज बहादुर से 13 बिस्वा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। सलोन पुलिस उपाधीक्षक यादवेंद्र पाल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की निगरानी में शव का अंतिम संस्कार हुआ।
पहली बार मारपीट के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
बृहस्पतिवार रात 8:30 बजे तेज बहादुर विवादित जमीन पर निर्माण करा रहा था। वीरेंद्र ने इसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया। शाम करीब 4:30 बजे वीरेंद्र दोबारा निर्माण कार्य रुकवाने पहुंचा। वहां तेज बहादुर, रीता और मीरा ने उसके साथ मारपीट की, जिससे वीरेंद्र का सिर फट गया। घायल वीरेंद्र ने थाने में तहरीर दी, जिस पर तीनों के खिलाफ मारपीट की प्राथमिकी दर्ज कर चिकित्सीय जांच कराई गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
रात में फिर हुई भिड़ंत के बाद की हत्या
इलाज के बाद वीरेंद्र घर लौट गया था। रात करीब 10 बजे वह अपने साथियों लल्लू, अंकित और अमरेश के साथ तेज बहादुर को खोजने निकला। पूरे कनपुरियन स्थित निर्माण स्थल पर दोनों पक्षों में फिर मारपीट हुई। आरोप है कि इस दौरान ससुर तेज बहादुर ने वीरेंद्र के पेट में कई बार चाकू से वार किया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
वीरेंद्र की मौत के बाद शुक्रवार सुबह परिजन और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। वीरेंद्र के मामा विशंभर सिंह, गांव के महेंद्र सिंह तथा पूर्व प्रधान बबलू सिंह ने आरोप लगाया कि यदि शाम 4:30 बजे हुई पहली मारपीट के बाद पुलिस ने तेजबहादुर सिंह और उसके परिजनों को हिरासत में ले लिया होता तो उनके भांजे की जान नहीं जाती। वीरेंद्र की पत्नी नीतू ने पुलिस को दी तहरीर में अपने पिता तेज बहादुर सिंह, मां रीता और मौसी मीरा पर पति का हत्या करने का आरोप लगाया।
पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
वीरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। पत्नी नीतू सिंह,बेटे अभिजीत, अधीर,तथा बेटी ऋषि का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी नीतू रोते हुए कह रही थीं, अब घर कैसे चलेगा, बच्चों को कैसे पढ़ाऊंगी, हे भगवान अब क्या होगा। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव आया तो परिवार में रोना पिटना मच गया। पूरे गांव में इस वारदात के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।
2014 में बैनामे के बाद हुआ था ससुर व दामाद में विवाद
नसीराबाद। वीरेंद्र कुमार की हत्या ने न केवल रिश्तों का कत्ल किया बल्कि जमीन के विवाद की खूनी पृष्ठभूमि को भी उजागर किया है। परिजनों के मुताबिक वीरेंद्र की पत्नी नीतू की नानी रामवती की रीता, मीरा सहित तीन बेटियां हैं। वर्ष 2014 में रामवती ने अपनी नातिन नीतू के नाम कुछ जमीन का बैनामा कर दिया था। बाद में नीतू का प्रेम विवाह वीरेंद्र सिंह से हुआ। वर्ष 2021 में वीरेंद्र ने उस जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया। इसकी जानकारी होने पर उनके ससुर तेजबहादुर सिंह और नीतू की मौसी मीरा सिंह ने न्यायालय में आपत्ति दाखिल की। हालांकि 24 अप्रैल 2026 को सलोन तहसीलदार ने तेजबहादुर की आपत्ति खारिज करते हुए जमीन का मालिकाना हक वीरेंद्र के पक्ष में मान्य कर दिया।बताया जा रहा है कि इसी जमीन पर तेजबहादुर, उनकी पत्नी रीता और मीरा निर्माण कार्य करा रहे थे, जिसे लेकर विवाद बढ़ता गया और आखिर में वीरेंद्र की हत्या का कारण बन गया।