रायबरेली। जिले में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत अभी तक एक भी बस का संचालन शुरू नहीं हुआ है। ढाई माह पहले आठ गांवों से निजी बसों के संचालन को झंडी मिली थी। इसके बाद 15 दिन में वाहन संचालित कराने का आदेश जारी होने के बावजूद अभी तक एक भी बस गांव क्षेत्र में नहीं पहुंची है। परिवहन निगम के जिम्मेदारों के तमाम प्रयासों के बाद भी वाहन संचालक गांव क्षेत्रों में बसें चलाने के लिए राजी नहीं हैं। परिवहन विभाग के अधिकारी योजना के तहत गांवों से वाहन संचालित कराने के प्रयास में हैं।
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत जिले की सभी 980 ग्राम पंचायतों से बसों का संचालन होना है। आवेदन आने के बाद पिछले माह डीएम ने आठ रूटों पर बसें संचालित कराने की स्वीकृति दी थी। डीएम ने दलीपुर से भोजपुर, सरेनी होने हुए रायबरेली, परसदेपुर से सलोन होते हुए रायबरेली, बनी से छातोह होते हुए रायबरेली, महारानीगंज से खीरों, सतांव होते हुए रायबरेली, सलोन से डीह, परशदेपुर होते हुए रायबरेली, पूरे राई से छतोह, परशदेपुर होते हुए रायबरेली, करौली दमा से डलमऊ होते हुए रायबरेली, बेड़ारू से शिवगढ़ होते हुए रायबरेली रूट पर निजी बसों को संचालित कराने की अनुमति थी।
वाहनों का संचालन 15 दिन में शुरू कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन एक माह बाद भी किसी भी रूट पर बस का संचालन शुरू नहीं हुआ। वाहन मालिक गाड़ियों का संचालन लखनऊ या कानपुर तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा टैक्स आदि को लेकर भी संशय होने के कारण वाहनों के मालिक अब इनके संचालन से पीछे हट रहे हैं। इस मामले में अब शासन ने एआरएम को वाहन मालिकों से बात करके बसों का संचालन कराने के निर्देश दिए हैं।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने बताया कि डीएम के स्तर से मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत आठ रूटों पर निजी बसें संचालित कराने की स्वीकृति मिली थी। अब तक वाहन संचालित नहीं हुए हैं। वाहनों के मालिकों से बात की जा रही है। जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों से वाहनों के संचालन कराए जाएंगे।