रायबरेली। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 596 किलोमीटर दूरी कम होने वाली है। यूपी बजट में गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए 489 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की गई है। हालांकि जिले को किसानों से जमीन लेने के लिए पहले ही 35 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
एक्सप्रेस-वे से एक ओर जहां जिले के 15 हजार किसानों को मुआवजे के रूप में जमीन का कई गुना लाभ मिल रहा है तो वहीं एक्सप्रेस-वे के किनारे रहने वाले ग्रामीणों की किस्मत चमकने वाली है। आवागमन सुगम होने के साथ ही एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर बसे गांवों की तस्वीर भी बदलेगी।
दिसंबर में गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जिले में करीब एक हजार हेक्टेयर जमीन की व्यवस्था के लिए 35 करोड़ रुपये मिलने के बाद जिला प्रशासन ने काम तेज कर दिया। लालगंज, डलमऊ, ऊंचाहार और सलोन तहसील क्षेत्रों के गांवों से यह एक्सप्रेस-वे निकलेगा। किसानों की जमीन खरीदने के लिए काम लगभग पूरा हो गया है।
जल्द ही किसानों को धनराशि का भुगतान करके जमीन एक्सप्रेस-वे के नाम दर्ज कराई जाएगी। सोमवार को आए बजट में प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण के साथ ही एक्सप्रेस-वे के निर्माण का काम शुरू कराने के लिए भी 489 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी है। जल्द ही हाईवे के निर्माण का काम शुरू होने वाला है।
गंगा एक्सप्रेस-वे रायबरेली सहित 12 जिलों से होकर निकलेगा। जिले के अलावा बदाऊं, हरदोई, उन्नाव, मरेठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, शाहजहांपुर, प्रतापगढ़ व प्रयागराज जिलों से गुजरेगा। जिले में किसानों से जमीन खरीदने की प्रक्रिया अंतिम दौर में चल रही है। बजट की व्यवस्था होने के बाद अब जल्द ही हाईवे के निर्माण का काम भी शुरू हो जाएगा।
एडीएम (प्रशासन) राम अभिलाष ने बताया कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण से गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीन के लिए 35 करोड़ रुपये मिलने के बाद किसानों से जमीन लेने का काम अंतिम दौर में है। जिले के करीब 15 हजार किसानों से जमीन ली जानी है। एक हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। बजट मिलने के बाद निर्माण का काम भी जल्द ही शुरू होगा।