पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने की कवायद अब कृषि विभाग की ओर से भी शुरू की गई है। फसलों की कटाई व मड़ाई के बाद बचे अवशेष (भूसा) को जलाना अब किसानों के लिए आसान नहीं होगा।
उच्चाधिकारियों ने भूसे के जलाने पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं। आदेश आने पर संबंधित अधिकारियों को प्रसार-प्रसार करके किसानों को जागरूक करने की बात कही है।
बावजूद इसके यदि कोई भूसा जलाएगा तो उस किसान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में तीन लाख 85 हजार किसान है। अक्सर देखा जाता है कि गेहूं हो या फिर धान समेत अन्य फसल।
फसल की कटाई, मड़ाई के बाद बचे अवशेष (भूसा) को किसान खेत में ही जला देते हैं। खेत में भूसा जलाने के कारण धुआं उठता है, जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान होता है।
बढ़ते प्रदूषण के खतरे के चलते कृषि विभाग की ओर से फसलों के भूसा जलाने पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं। यहां आदेश आने पर विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
कृषि विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को गांवों में प्रचार-प्रसार करके किसानों को जागरूक करने की बात कही गई है, ताकि वह फसलों के बचे अवशेष को खेतों में जलाने के बजाय सड़ाएं।
बात न बनने पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कृषि अधिकारियों के अनुसार भूसे को जलाने पर प्रतिबंध लगाने से न सिर्फ पर्यावरण साफ सुथरा होगा।
बल्कि खेत की मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी। दरअसल किसान फसलों के बचे अवशेष को खेत में जला देते हैं। इससे प्रदूषण होता है। यदि बचे अवशेष को खेत में ही सड़ा दें तो मिट्टी की सेहत ठीक हो सकेगी।
मिट्टी की सेहत ठीक होने पर फसल उत्पादन भी बढ़ेगा। खेतों में फसलों के भूसे को जलाने के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी आ रही है। इस प्रयोग से मिट्टी की सेहत में सुधार हो सकेगा।