जगतपुर - रायबरेली। मदद के नाम पर झूठा आश्वासन दिया जा रहा है। हादसे के चार दिन बाद भी पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं मिल सका है। बुधवार को भड़के परिजन व ग्रामीणों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। मदद दिलाने में जिला प्रशासन के अफसर ढिलाई बरत रहे हैं।
जगतपुर थाना क्षेत्र में रविवार की शाम चूली गांव के पास निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर कार की चपेट में आने से कोडर की आसमां, हिमांंशी, शालिनी, रश्मि यादव की मौत हो गई थी, जबकि रिया पटेल, उसकी बहन प्रिया पटेल के अलावा साधना, मीना, रेशमा घायल हो गईं थी। मामले में गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज करके कार चालक विकास मिश्रा को जेल भेज दिया गया है।
एक्सप्रेसवे पर जिस तरह घटना हुई, उसकी चर्चा रायबरेली के साथ ही प्रदेशभर में हुई। कोई कह रहा है कि एम्स में ट्रामा सेंटर बना होता तो बेटियों की जान बच जाती। कोई कह रहा है कि एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा को लेकर उचित कदम उठाए गए होते तो यह घटना न होती। घटना के बाद पीड़ित परिवारों को मदद का भरोसा भी दिया गया, लेकिन चार दिन बाद भी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया है।
दब गई मदद की आवाज
निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर हुई चार लड़कियों की मौत के मामले को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक शोरगुल मचा रहा। कोई ट्रामा सेंटर न होने का मुद्दा उठा रहा है, तो कोई घटना के लिए एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा न होने की बात कह रहा है। इस शोरशराबे के बीच पीड़ित परिवारों की मदद की आवाज दब गई है। यही वजह है कि चार दिन बाद भी पीड़ित परिवारों को सरकारी मदद का इंतजार है।
मृतकों के परिवार को मिलेगी दो-दो लाख की मदद-एडीएम प्रशासन
एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ ने बताया कि मृतक के परिवारों को दो-दो लाख रुपये व घायल के परिवारों को 50-50 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था ने भी मृतकों के परिवार को एक-एक लाख रुपये मदद देने का ऐलान किया है। चार मृतकों में से तीन मृतकों के परिवार के पास सरकारी आवास पहले से ही है। एक मृतक परिवार के पास आवास नहीं है, जिसे मुख्यमंत्री आवास का लाभ दिलाया जाएगा। इसके लिए एसडीएम ऊंचाहार से रिपोर्ट मांगी गई है। अन्य सरकारी मदद भी सरकारी आदेश पर पीड़ित परिवारों को दिलाई जाएगी।