रायबरेली। गर्मी में डेंगू, एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है। जिले के नौ सीएचसी में इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) खोल दिए गए हैं। इसके अलावा तेज बुखार और डेंगू के मरीजों को भर्ती करने के लिए 19 सीएचसी में दो-दो बेड आरक्षित किए गए हैं।
ईटीसी और डेंगू वार्डों में दवाओं के पर्याप्त बंदोबस्त कराने के निर्देश अधीक्षकों को दिए गए हैं। सीएचसी स्तर पर गंभीर मरीजों का इलाज करने को कहा गया है। गंभीर स्थिति में ही उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
जिले में पिछले साल एईएस और जेई के सवा सौ से अधिक मरीज मिले थे। डेंगू के मरीजों की संख्या भी 100 को पार कर गई थी। एईएस और जेई के मरीजों का तुरंत इलाज शुरू करने के लिए हरचंदपुर, महराजगंज, बछरावां, सलोन, जगतपुर, ऊंचाहार, डलमऊ, लालगंज और खीरों के सीएचसी में ईटीसी सेंटर स्थापित किया गया है। यहां दो-दो बेड रखवाए गए हैं। जांच और इलाज के लिए पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
जगतपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. एलपी सोनकर ने बताया कि ईटीसी सेंटर को संचालित करा दिया गया है। हालांकि अब तक मरीज नहीं आए हैं। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं।
डेंगू के सामान्य लक्षण वाले मरीज होंगे भर्ती
जिला मलेरिया अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि सीएचसी स्तर पर डेंगू के सामान्य लक्षण वाले मरीजों को भी भर्ती करके इलाज किया जाएगा। डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाएगा। मच्छरजनित रोगों के रोकथाम के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी शुरू कराया गया है।
अधीक्षकों को क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए है। लक्षण वाले मरीजों को वार्ड में भर्ती करके इलाज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। लोग एहतियात बरतें और मच्छरों से बचें।
- डॉ. नवीनचंद्रा, सीएमओ