रायबरेली। पिछले दिनों जिले में दो बार आई आंधी के बाद जिले की व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पा रही है। इसकी मुख्य वजह बिजली खंभों की कमी बताई जा रही है। पावर कॉर्पोरेशन के अवर अभियंता जुगाड़ से किसी तरह बिजली आपूर्ति बहाल कराने का प्रयास कर रहे हैं। अभी भी करीब 150 गांवों की बिजली पटरी पर नहीं लौट पाई है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
पहली बार 13 मई को आंधी और बारिश के चलते करीब दो हजार बिजली के खंभे टूट गए थे। इससे कई दिनों तक गांवों की बिजली आपूर्ति गुल रही। बिजली आपूर्ति पर लौटने से पहले 28 मई को फिर आई आंधी से व्यवस्था चरमरा गई। दूसरी बार आई आंधी में करीब 500 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए।
ज्यादातर गांवों की बिजली आपूर्ति तो बहाल हो गई, लेकिन जगतपुर, कठगर, छतोह, लालगंज, सरेनी, डलमऊ, गदागंज क्षेत्र के करीब 150 गांव ऐसे हैं, जहां दो दिन से बिजली बहाल नहीं हो पाई है। इससे लोगों को पेयजल समेत अन्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
लटकते तारों से हो सकते हादसे
रायबरेली। जिले में बिजली खंभों की कमी को देखते हुए अभियंताओं ने जैसे-तैसे बिजली आपूर्ति तो बहाल करा दी है, लेकिन इस लापरवाही से किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। कई जगह टूटे खंभे की जगह नया खंभा नहीं लगाया है। सीधे तार खींच दिए गए हैं। इससे कई जगह बिजली के तार लटक रहे हैं।
खंभों की कमी नहीं, बहाल हो गई बिजली
जिले दो बार आई आंधी में बड़ी संख्या में खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं। खंभों की कोई कमी नहीं है। सभी जगह खंभे लगवाकर बिजली आपूर्ति बहाल करा दी गई है। यदि किसी गांव की बिजली बंद है, तो शिकायत मिलने पर समस्या को दूर कराया जाएगा
रविचंद्र श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरेशन