रायबरेली। चुनाव आयोग से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को रखने के लिए गोदाम के लिए मिले 58 लाख रुपये की बंदरबांट के बाद आखिरकार कार्यदायी विभाग पैकफेड ने काम पूरा करवा दिया है।
घोटाले के कारण गोदामों के निर्माण का काम पूरा कराने में पांच साल लग गए। घोटाले में चुनाव कार्यालय के बाबू के खिलाफ एफआईआर के साथ ही निलंबन की कार्रवाई की गई थी। आरोपी बाबू व अन्य लोगों से वसूली कराकर गोदाम का काम पूरा कराया गया है। अब गोदामों को हैंडओवर कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वर्ष 2015 में चुनाव आयोग से सभी छह विधानसभा क्षेत्रों की ईवीओ को अलग-अलग रखवाने के लिए सदर तहसील परिसर में गोदाम निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये मिले थे। निर्माण इकाई पैकफेड का गोदामों के निर्माण का काम दिया गया था।
निर्माण इकाई को 58 लाख रुपये पहली किस्त में देकर काम शुरू करवाया गया था। कार्यदायी संस्था ने जनवरी 2016 को दूसरी किस्त की डिमांड की तो घोटाला उजागर हो गया। मामले में चुनाव कार्यालय के बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। प्रशासन ने दबाव बनाकर कई लोगों से 57.35 लाख रुपये की वसूली करके कार्यदायी विभाग को दिया गया।
कार्यदायी विभाग के सहायक अभियंता एके सिंह के प्रयास से काम पूरा करवा दिया है। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि ईवीएम गोदाम का काम पूरा हो गया है। जल्द ही हैंडओवर करके ईवीएम को सुरक्षित रखवाया जाएगा।