रायबरेली। जिले में नाइट ब्लड सर्वें में बनाई गईं 7200 स्लाइडों की जांच पूरी हो गई है। इसमें फाइलेरिया के मात्र आठ नए रोगी मिले हैं। यह अभियान आठ सर्वाधिक फाइलेरिया प्रभावित ब्लॉकों में चलाया गया था। इस दौरान रोगी न मिलने से खीरों, सलोन, डीह, हरचंदपुर और राही ब्लॉक खतरे से बाहर हो गए हैं। जबकि बछरावां ब्लॉक के कुर्री, राजामऊ, इसिया, सतांव ब्लॉक के किलौली, पोरई और महराजगंज के मोन में फालेरिया के एक-एक व राघवपुर गांव में दो मरीज मिले हैं। इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी रमेशचंद्र यादव ने बताया कि जिले को फाइलेरिया मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के 10 ब्लॉकों में रोग पर बेहतर नियंत्रण है, लेकिन बछरावां, बेलाभेला, डीह, हरचंदपुर, जतुआ-टप्पा, खीरों, महराजगंज और सलोन में फाइलेरिया से ज्यादा मरीज होने के बाद नाइट ब्लड सर्वे कराया गया था। सभी ब्लॉकों से नौ-नौ सौ स्लाइडें बनाकर जांच कराई गई। सिर्फ बछरावां, सतांव और महराजगंज में फाइलेरिया के आठ नए मरीज मिले हैं।
फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया के शुरुआती लक्षण कई सालों तक दिखाई नहीं देते, लेकिन इस दौरान यह शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता रहता है। पैरों, हाथों, स्तनों या जननांगों में असामान्य और भारी सूजन (हाथी पांव), रुक-रुक कर हल्का बुखार आना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
फाइलेरिया से बचाव और उपचार
जिला मलेरिया अधिकारी रमेशचंद्र यादव ने बताया कि एक बार अंगों में सूजन जाने के बाद इसे पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है, इसलिए बचाव ही इसका सबसे मुख्य उपाय है। इससे बचाव के लिए वर्ष में एक या दो बार फाइलेरिया-रोधी दवा (डीईसी और एल्बेन्डाजोल) मुफ्त खिलाई जाती है। यह दवा शरीर में मौजूद छिपे हुए फाइलेरिया के कीड़ों को खत्म करती है। सुझाव दिया कि सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें।