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प्रधानाध्यापक भी आए जद में, रोका वेतन, मांगा स्पष्टीकरण

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रायबरेली। दो साल पहले एक विद्यालय के अनुचर को मौखिक आदेश पर बीआरसी के लिए कार्यमुक्त किया गया। दो साल बाद फिर मौखिक आदेश पर विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराने की बारी आई तो मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया। कार्रवाई की जद में अब विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी आ गए हैं। उनका वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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मामला सरेनी विकास क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय मथुरपुर का है। यह मामला उस समय उजागर हुआ, जब इसी महीने 6 मार्च को प्रधानाध्यापक का एक पत्र बीएसए को मिला।
इस पत्र में बताया गया कि संकुल प्रभारी जितेंद्र पटेल के मौखिक आदेश पर 13 मार्च 2019 को अनुचर सचिन कुमार को ब्लॉक संसाधन केंद्र सरेनी में उपस्थिति के लिए विद्यालय से कार्यमुक्त किया गया था।
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दो साल बाद 3 मार्च 2021 को जितेंद्र पटेल ने दूरभाष पर कहा कि अनुचर को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करा लिया जाए। खंड शिक्षा अधिकारी का पत्र बाद में मिल जाएगा। बीईओ का पत्र न मिल पाने के कारण अनुचर को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है।
अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने कंपोजिट विद्यालय मथुरपुर के प्रधानाध्यापक रामेश्वर मौर्या से पूछा है कि किस अधिकारी के आदेश या निर्देश पर अनुचर सचिन कुमार को विद्यालय से कार्यमुक्त किया गया।
बीएसए ने प्रधानाध्यापक का वेतन अग्रिम आदेशों तक बाधित करते हुए साक्ष्यों सहित एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा। यह भी पूछा है कि पर्याप्त समय व्यतीत होने के बाद भी किन परिस्थितियों में उच्चाधिकारियों को प्रकरण से अवगत नहीं कराया गया। बीएसए ने बताया कि प्रधानाध्यापक का स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अनुचर और संकुल प्रभारी से पहले मांगा जा चुका है जवाब
कंपोजिट विद्यालय मथुरपुर के प्रकरण में अनुचर और संकुल प्रभारी से पहले ही जवाब मांगा जा चुका है। बीती 10 मार्च को बीएसए ने अनुचर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सेवा समाप्ति की चेतावनी दी थी। इसके अलावा बीती 18 मार्च को संकुल प्रभारी का वेतन रोका गया था। उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब प्रकरण से जुड़े प्रधानाध्यापक का वेतन रोकते हुए जवाब मांगा गया है।
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