रायबरेली। नहरों में पानी छोड़े हफ्ता भर भी नहीं बीता कि पानी के उफान ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। कहीं पानी के अभाव में फसल सूख रही है तो कहीं पानी में डूबकर फसल बर्बाद हो रही है। खास बात यह है कि माइनरों में हेड से टेल तक पानी पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि एक सप्ताह के अंदर चार माइनरों में कटान हुई जिससे करीब एक हजार बीघे की फसल जलमग्न हो गई। इससे किसानों को दोबारा फसल बोने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
रायपुर महेरी माइनर में दो बार कटान हो चुकी है। इस वजह से यहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। राही ब्लॉक क्षेत्र से होकर निकली रायपुर महेरी माइनर में पहली कटान भदोखर गांव के पास हुई। यहां कटान बंधवाकर पानी छोड़ा गया तो दुबारा भखरवारा गांव के पास नहर कट गई। दोनों जगह करीब 500 बीघे गेहूं की फसल बर्बाद हुई।
इसी तरह गढ़ीखास माइनर कटने से करीब 50 बीघे फसल जलमग्न हुई। यही नहीं पानी महराजगंज-रायबरेली रोड पर भरा रहा। इससे वाहन चालकों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना पड़ा। इसी तरह डलमऊ पंप कैनाल से निकले पूर्वा बांच नहर की पटरी की कटान होने से करीब 100 बीघे फसल जलमग्न हो गई। इसी तरह सुट्ठा हरदो माइनर में अधिक पानी छोड़े जाने से मवई गांव के पास उफनाकर कट गई। इससे आसपास के खेतों में बोई करीब 50 बीघे की फसल जलमग्न हो गई। किसानों ने कड़ी मशक्कत करके नहर की कटान को बांधा।
फसलों को जिस समय पानी की जरूरत रहती हैं, उस समय पानी ही नहीं रहता है। छतोह ब्लॉक क्षेत्र के किसान रामअचल यादव ने बताया कि पदुमपुर माइनर में छह माह से पानी नहीं आया है। किसान निजी नलकूप से सिंचाई करते हैं। इसी तरह दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र के मनोज तिवारी, खीरों के संजय कुमार व धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जरूरत के समय सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है। जब पानी छोड़ा जाता है तो मांग नहीं रहती है। इस वजह से नहरों में कटान होती है। इससे किसानों की फसल तबाह हो जाती है जिसे देखने और सुनने वाला कोई नहीं है। खास बात यह है कि खराब हुई फसल का मुआवजा तक नहीं मिलता है।